राँची: मौसम एक बार फिर अपना रूप बदल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने रांची और राज्य के कई हिस्सों के लिए अगले 24 से 48 घंटे में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और सक्रिय मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से राज्य के अधिकांश जिलों में मौसम अस्थिर रहेगा और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मुख्य चेतावनी और प्रभावित जिले
IMD ने रांची, खूँटी, गुमला, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, धनबाद और गिरिडीह समेत कुल 17 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24-48 घंटों के दौरान गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। साथ ही 40 से 60 किमी प्रति घंटा तक की तेज हवाओं के चलने की संभावना बनी हुई है, जिससे पेड़ और अस्थायी ढांचे प्रभावित हो सकते हैं।
वज्रपात और अधिक जोखिम वाले जिले
मौसम विभाग ने रांची, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में वज्रपात (ग्रैड) की संभावना जताई है। इन क्षेत्रों में बिजली गिरने और वज्रपात से संबंधित नुकसान के कारण लोगों से सावधानी बरतने, खुले स्थानों से दूर रहने तथा उच्च भवनों और पेड़ों के पास खड़े न होने की सलाह दी गई है।
बारिश और गर्मी का मेल
रवानी हवा और स्थानीय परिस्थितियों की वजह से कुछ जिलों में अनपेक्षित मौसम संयोजन देखने को मिल सकता है। हालाँकि अधिकांश स्थानों पर बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है, फिर भी पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम के कुछ इलाकों में दिन के दौरान तीव्र गर्मी बनी रहने की संभावना है। इन इलाकों में तापमान 40°C से ऊपर रिकॉर्ड किया जा सकता है, इसलिए बाहर काम करने वाले लोग और कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
कहाँ मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा
IMD ने रांची, दुमका, देवघर, जामताड़ा, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा में बादल और बारिश के कारण मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की संभावना जताई है। इन जिलों में तापमान अपेक्षाकृत नियंत्रित रहेगा और स्थानीय लोगों को मॉनसून की सामान्य सक्रियता का अनुभव होगा।
मौसम एक बार फिर बदल रहा है और रांची व आसपास के 17 जिलों में अगले 24-48 घंटों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात की सम्भावना है। IMD का येलो अलर्ट सतर्कता के संकेत देता है नागरिकों, किसानों और अधिकारियों को आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को भी संभावित प्रभावों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
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