फ्रांस में क्यों सुलग रहा छात्र आंदोलन, पुलिस से भिड़ंत और हजारों गिरफ्तार

फ्रांस में स्कूलों की बदहाल स्थिति और शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब व्यापक विरोध प्रदर्शन में बदल गया है। छात्रों की मांग है कि जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कराई जाए, शिक्षकों की कमी दूर हो, कक्षाओं में पर्याप्त टेबल-कुर्सियां उपलब्ध हों और शिक्षा पर खर्च बढ़ाया जाए

NEWS SAGA DESK

फ्रांस में स्कूलों की बदहाल स्थिति और शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब व्यापक विरोध प्रदर्शन में बदल गया है। छात्रों की मांग है कि जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कराई जाए, शिक्षकों की कमी दूर हो, कक्षाओं में पर्याप्त टेबल-कुर्सियां उपलब्ध हों और शिक्षा पर खर्च बढ़ाया जाए।

प्रदर्शनकारियों ने कई स्कूलों में पानी टपकने, चूहों की मौजूदगी और शौचालयों में दरवाजे तक नहीं होने जैसी समस्याएं उठाई हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, 21 सितंबर को क्रेटेल के एक स्कूल में छात्रों ने गेट बंद कर आंदोलन की शुरुआत की। इसके बाद विरोध दूसरे स्कूलों तक फैल गया और 1200 से अधिक स्कूलों में तालाबंदी किए जाने का दावा किया गया।

6 अक्टूबर को प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 2.66 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जबकि आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या 4.5 लाख बताई। पेरिस समेत कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। हालात संभालने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, लेंस में 15 वर्षीय छात्र का हाथ ग्रेनेड से गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि पेरिस में 14 वर्षीय छात्र के दांत टूटने की घटना सामने आई। अब तक हजारों गिरफ्तारियों का दावा किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की बताई जा रही है।

शिक्षा मंत्री एडवर्ड जेफ्रे के हवाले से स्कूलों में आगजनी और तोड़फोड़, कर्मचारियों के घायल होने तथा छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि हिंसा वाले स्थानों पर कदम उठाए गए। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने भी हिंसा की स्थिति में कार्रवाई की बात कही। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मामले पर आपात बैठक बुलाई है।

शिक्षा बजट में प्रस्तावित कटौती ने छात्रों की नाराजगी और बढ़ा दी है। छात्र संगठनों ने आगे भी प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा फ्रांस सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।

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