ब्रिटेन दौरे पर PM मोदी: तीन साल की बातचीत के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तय, जानें इसके संभावित फायदे और नुकसान

News Sag Desk

लंदन। PM मोदी बुधवार को ब्रिटेन के दो दिन के दौरे पर रवाना होंगे। यह उनकी चौथी ब्रिटेन यात्रा है। यहां वे ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के न्योते पर जा रहे हैं। यह जानकारी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दी है। कीर स्टार्मर के प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की यह पहली ब्रिटेन यात्रा है। PM की मुलाकात ब्रिटिश सम्राट किंग चार्ल्स से भी होगी।

लंदन में पीएम मोदी और स्टार्मर के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। इसमें दोनों के बीच भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), रक्षा, टेक्नोलॉजी और जलवायु जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी। FTA को लेकर दोनों देशों के बीच 3 साल से ज्यादा समय तक बातचीत चली, जो अब जाकर पूरी हुई है।

पीएम मोदी आखिरी बार नवंबर 2021 में ब्रिटेन गए थे। वे ग्लासगो, स्कॉटलैंड में हुए COP26 में शामिल हुए थे।

पीएम मोदी आखिरी बार नवंबर 2021 में ब्रिटेन गए थे। वे ग्लासगो, स्कॉटलैंड में हुए COP26 में शामिल हुए थे।

5 साल में व्यापार दोगुना करना मकसद

पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच तीन साल तक चली बातचीत के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन किया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एग्रीमेंट के मसौदे की लीगल प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

FTA का मतलब होता फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, जिसे हिंदी में ‘मुक्त व्यापार समझौता’ कहा जाता है। यह ऐसा समझौता होता है जो दो या अधिक देशों के बीच होता है, ताकि वे आपस में सामान और सेवाओं का व्यापार आसानी से कर सकें, और उस पर कम टैक्स (ड्यूटी) लगाएं या बिलकुल टैक्स न लगाएं। इससे दोनों देशों की कंपनियों को फायदा होता है, क्योंकि उनके सामान सस्ता हो जाता है जिससे लोग ज्यादा खरीदारी करते हैं।

FTA को मंजूरी मिलने में 1 साल का वक्त लगेगा

पीएम मोदी के साथ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी ब्रिटेन यात्रा पर हैं। FTA से जुड़ी बातचीत में उनका प्रमुख रोल है। FTA पर दोनों देशों के बीच दस्तखत होने के बाद उसे भारत की कैबिनेट और ब्रिटेन की संसद से स्वीकृति मिलना जरूरी होगा। इसमें 6 महीने से 1 साल तक का वक्त लग सकता है।

इससे पहले 6 मई को दोनों देशों के बीच डील फाइनल हुई थी। समझौते पर दस्तखत के बाद इसे ब्रिटिश संसद और भारत की कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी। FTA का मकसद 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 120 अरब डॉलर करना है। एग्रीमेंट साइन होने के बाद भारत के लेदर, फुटवियर, टेक्सटाइल, खिलौने, जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे लेबर-इंटेंसिव प्रोडक्ट्स पर UK में एक्सपोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा।

वहीं ब्रिटिश व्हिस्की, कार जैसे प्रोडक्ट्स भारत में सस्ते हो जाएंगे। डील के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार 2030 तक 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही दोनों देशों में डिजिटल, इंजीनियरिंग, मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार की उम्मीद है।

दोनों देशों के बीच एग्रीमेंट से ये सामान सस्ते हो सकते हैं-

  • कारें: ब्रिटेन की लग्जरी कारें जैसे जगुआर लैंड रोवर अब कम दाम में मिल सकती है।
  • स्कॉच व्हिस्की और वाइन: इंग्लैंड से आने वाली शराब और वाइन पर टैरिफ कम होगा, जिससे ये पहले से सस्ती मिलेंगी।
  • फैशन और कपड़े: ब्रिटेन से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, फैशन प्रोडक्ट्स और होमवेयर भी सस्ते हो सकते हैं।
  • फर्नीचर और इलेक्ट्रिकल सामान: ब्रिटेन से आने वाला फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रीयल मशीनरी अब कम कीमत पर मिल सकते हैं।
  • ज्वेलरी और रत्न: भारत के रत्न और आभूषण ब्रिटेन में सस्ते बिकेंगे, जिससे ब्रिटेन में भारतीय कस्टमर्स के लिए प्रोडक्ट्स सस्ते हो सकते हैं।

दोनों देशों के बीच एग्रीमेंट से ये सामान सस्ते हो सकते हैं-

  • कारें: ब्रिटेन की लग्जरी कारें जैसे जगुआर लैंड रोवर अब कम दाम में मिल सकती है।
  • स्कॉच व्हिस्की और वाइन: इंग्लैंड से आने वाली शराब और वाइन पर टैरिफ कम होगा, जिससे ये पहले से सस्ती मिलेंगी।
  • फैशन और कपड़े: ब्रिटेन से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, फैशन प्रोडक्ट्स और होमवेयर भी सस्ते हो सकते हैं।
  • फर्नीचर और इलेक्ट्रिकल सामान: ब्रिटेन से आने वाला फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रीयल मशीनरी अब कम कीमत पर मिल सकते हैं।
  • ज्वेलरी और रत्न: भारत के रत्न और आभूषण ब्रिटेन में सस्ते बिकेंगे, जिससे ब्रिटेन में भारतीय कस्टमर्स के लिए प्रोडक्ट्स सस्ते हो सकते हैं।

घरेलू शराब कंपनियों को कॉम्पिटिशन मिलेगा

इस समझौते के कारण यू.के. से आने वाली व्हिस्की भारत में कम कीमत पर उपलब्ध होगी, जो दुनिया का सबसे बड़ा व्हिस्की बाजार है। हालांकि, इस डील के बाद उन घरेलू शराब कंपनियों को कॉम्पिटिशन मिलेगा, जो प्रीमियम अल्कोहल मार्केट में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के सीईओ मार्क केंट ने इस डील को ‘ट्रांसफॉर्मेशनल’ बताया और कहा, “यू.के.-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एक पीढ़ी में एक बार होने वाला सौदा है और दुनिया के सबसे बड़े व्हिस्की बाजार में स्कॉच व्हिस्की एक्सपोर्ट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।”


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