बोकारो की लापता युवती के मिले नरकंकाल मामले में हाई कोर्ट सख्त, कहा DNA क्यों नहीं हुआ

News Saga Desk

झारखंड हाई कोर्ट में बोकारो की लापता युवती से जुड़े संवेदनशील मामले में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जंगल से बरामद नर कंकाल का डीएनए परीक्षण नहीं कराए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इतने गंभीर और संवेदनशील मामले में वैज्ञानिक जांच की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि डीएनए टेस्ट किसी भी पहचान स्थापित करने का सबसे महत्वपूर्ण और विश्वसनीय माध्यम होता है, इसके बावजूद अब तक जांच एजेंसियों द्वारा इसे नहीं कराना लापरवाही को दर्शाता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य के पुलिस महकमे के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया है। कोर्ट ने झारखंड पुलिस के डीजीपी, संबंधित क्षेत्र के आईजी, डीआईजी, बोकारो के एसपी, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) के निदेशक और इस केस की जांच कर रही एसआईटी टीम को अगली सुनवाई में सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि लापता युवती के मामले में जांच की रफ्तार बेहद धीमी रही है और कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है। विशेष रूप से जंगल से मिले नर कंकाल की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे मामले में और अधिक संदेह उत्पन्न हो रहा है।

कोर्ट ने जांच एजेंसियों को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में समय पर और वैज्ञानिक तरीके से जांच करना बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि अगली सुनवाई तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो कड़ी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।

मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां सभी अधिकारियों को अपनी-अपनी रिपोर्ट और जांच से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इस मामले पर अब राज्यभर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह न केवल एक लापता युवती का मामला है, बल्कि जांच एजेंसियों की जवाबदेही का भी बड़ा परीक्षण बन गया है।

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