अप्रैल में ही झुलस रहा भारत, 20 में 19 सबसे गर्म शहर भारत में, मई की तपिश बाकी

News Saga Desk

भारत के अधिकांश राज्यों में इस समय भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। अभी अप्रैल ही चल रहा है, लेकिन तापमान जिस तरह से बढ़ रहा है, उसने मई-जून की प्रचंड गर्मी की आहट अभी से दे दी है।यानि अभी हमने गर्मी की झलक देखी है अभी उसका प्रचंड रूप देखना बाकि है हालात ऐसे हैं कि लोग घर से निकलने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हैं। बिना गमछा, टोपी या स्कार्फ के बाहर निकलना मानो खुद को तपती धूप के हवाले करना है।

दिन ही नहीं, रात में भी राहत नहीं मिल रही। दिनभर की तेज धूप के कारण घरों की दीवारें गर्म होकर रात में भी तपती रहती हैं, जिससे लोगों की नींद प्रभावित हो रही है। सुबह 8 बजे के बाद ही बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। लगातार बढ़ती गर्मी के चलते हीटवेव का खतरा बढ़ गया है और लोग हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह एक ही क्षेत्र में अत्यधिक तापमान का जमा होना मौसम में बढ़ती अस्थिरता का संकेत है। अप्रैल में ही जिस तरह की गर्मी देखने को मिल रही है, उससे साफ है कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

भारत इस समय दुनिया के सबसे गर्म देशों में शामिल हो गया है। 21 अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में से 19 भारत में स्थित हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि 22 से 24 अप्रैल के बीच तापमान में और वृद्धि होगी और अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यानी यह सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि हीटवेव की शुरुआत है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, तो उसे हीटवेव की श्रेणी में रखा जाता है। इस दौरान चलने वाली गर्म और शुष्क हवाएं ‘लू’ का रूप ले लेती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होती हैं।

सबसे अधिक प्रभावित शहरों में बिहार का भागलपुर, ओडिशा का तालचेर और पश्चिम बंगाल का आसनसोल शामिल हैं, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इसमें झारखंड के भी कुछ जिलें है जहां तापमान अधिक बढ़ जाता है। आमतौर पर मई में पड़ने वाली चरम गर्मी इस बार अप्रैल में ही देखने को मिल रही है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस असामान्य गर्मी के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है ‘सोलर हीटिंग’, यानी सूर्य की सीधी किरणों का धरती की सतह को तेजी से गर्म करना। इस महीने आसमान साफ रहने के कारण सूर्य की गर्मी बिना किसी बाधा के जमीन तक पहुंच रही है।

इसके अलावा, हिमालय और यूरेशिया क्षेत्र में इस बार बर्फ की मात्रा कम होने से भी स्थिति गंभीर हुई है। सामान्यतः बर्फ सूर्य की किरणों को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित कर देती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पा रहा। समुद्री तापमान में बदलाव और प्राकृतिक संतुलन में कमी भी इस बढ़ती गर्मी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

मैदानी इलाकों में चलने वाली गर्म और शुष्क हवाएं स्थिति को और खराब कर रही हैं। उत्तर-पश्चिम से आने वाली ये हवाएं बादलों के निर्माण को रोक रही हैं, जिससे बारिश की संभावना कम हो गई है। वहीं, देश के दक्षिण और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में नमी और तूफानी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, जो मौसम की अस्थिरता को दर्शाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जून तक मानसून नहीं पहुंचता, तो तब तक इस भीषण गर्मी से राहत मिलना मुश्किल है। ऐसे में आने वाले दिन आम लोगों के लिए और भी कठिन साबित हो सकते हैं।

Read More News

रांची में पुलिस–अपराधी मुठभेड़: जमीन कारोबारी हत्याकांड का शूटर घायल, पार्षद हत्याकांड में भी था शामिल

रांची: राजधानी में पूर्व पार्षद और जमीन कारोबारी की हत्या के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची...

स्वर्णरेखा नदी तट पर मिला द्वितीय विश्व युद्ध का बम निष्क्रिय, इलाके में लौटी सामान्य स्थिति

पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा स्थित पानीपड़ा-नागुइसाई के पास स्वर्णरेखा नदी तट पर मिला द्वितीय...

Read More