News Saga Desk
रांची में झारखंड सरकार के जल संसाधन विभाग और सस्टेनेबल कॉमर्स फोरम के संयुक्त तत्वावधान में “सुजलम झारखंड 2026” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण, जल सुरक्षा और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच व्यापक चर्चा करना था।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित तकनीकी सत्र में मेड़बंदी मॉडल और झारखंड में उसकी उपयोगिता, जल निगरानी प्रणाली, “स्पंज सिटी” की अवधारणा, जलवायु-संवेदनशील सिंचाई तथा राष्ट्रीय नेट-जीरो लक्ष्यों से जुड़ी नीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने राज्य में जल सुरक्षा की चुनौतियों और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मौजूद देश के प्रसिद्ध “जल योद्धा” पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने कहा कि झारखंड वन, पहाड़ और झरनों का प्रदेश है, लेकिन तेजी से बर्बाद हो रहे जल संसाधनों को बचाना आज सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता बताई।
वहीं, सीएमपीडीआई के पर्यावरण विभाग के महाप्रबंधक वी. के. पाण्डेय ने कहा कि जल संरक्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख चिंताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि “मन की बात” कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री समय-समय पर जल संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करते रहे हैं। इसी दिशा में सीएमपीडीआई ने कोल खदान क्षेत्रों में जल संरक्षण और जल संग्रहण से जुड़े कई रोजगारपरक कार्यक्रम शुरू किए हैं।
कार्यक्रम में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एस. सी. दूबे ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जल संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन इस समस्या का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता से संभव है।
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