नेपाल में निजी स्कूलों पर 3% ‘शिक्षा समता शुल्क’ का विरोध, अभिभावकों ने सरकार से पुनर्विचार की मांग की

NEWS SAGA DESK

काठमांडू :– नेपाल सरकार द्वारा निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों की फीस पर 3 प्रतिशत ‘शिक्षा समता शुल्क’ लगाने की घोषणा के बाद निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों और अभिभावक संगठनों ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि यह निर्णय लाखों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा।

सरकार ने आर्थिक वर्ष 2026-27 के बजट में निजी विद्यालयों द्वारा वसूले जाने वाले सभी प्रकार के शुल्क पर 3 प्रतिशत शिक्षा समता शुल्क लगाने का प्रावधान किया है। इस निर्णय का असर देशभर के लगभग 26 लाख विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर पड़ने की संभावना है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार नेपाल में 8,941 निजी विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 26 लाख 57 हजार 170 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। अभिभावक संगठनों का कहना है कि पहले से ही निजी विद्यालयों की फीस काफी अधिक है और उस पर अतिरिक्त शुल्क लगाना परिवारों की आर्थिक परेशानियां बढ़ा सकता है।

निजी विद्यालय संचालक संघ ने एक बयान जारी कर कहा कि सामुदायिक विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर विश्वास की कमी के कारण अनेक अभिभावक अपनी अन्य जरूरतों में कटौती कर बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। ऐसे में 3 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क उनके लिए नया आर्थिक बोझ बन जाएगा।

संगठन का कहना है कि लाखों परिवार पहले ही शिक्षा पर बड़ी राशि खर्च कर रहे हैं और नई व्यवस्था उनके बजट पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। इसलिए सरकार को इस निर्णय की समीक्षा करनी चाहिए।

वहीं, अभिभावक महासंघ की सदस्य रमा गिरी ने सरकार के कदम की आलोचना करते हुए इसे अभिभावक विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि कई परिवार सीमित आय में अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।

रमा गिरी के अनुसार ऐसे भी अभिभावक हैं जो प्रतिदिन लगभग 1,000 नेपाली रुपये कमाकर अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। उनके लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना कठिन होगा। उन्होंने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करने की अपील की।

निजी विद्यालय संचालकों और अभिभावक संगठनों का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए संसाधन जुटाना आवश्यक है, लेकिन इसका बोझ सीधे अभिभावकों पर डालना उचित नहीं होगा। अब इस मुद्दे पर सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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