News Saga Desk
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। इसी बीच अमेरिका ने एक नया टैरिफ प्रस्ताव पेश कर दिया है, जिसने व्यापार वार्ताओं के बीच नई चर्चा छेड़ दी है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने बुधवार को सेक्शन 301 के तहत की गई 60 जांचों के निष्कर्ष सार्वजनिक किए। इनमें भारत समेत 53 अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्रस्ताव उन देशों के लिए है, जो कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labour) से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसे लागू करने में विफल रहे हैं।
व्यापार वार्ता के बीच आया प्रस्ताव
यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिवसीय बैठक कर रहे हैं। दोनों देश लंबे समय से एक व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं।
USTR ने क्या कहा?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि जिन अर्थव्यवस्थाओं ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने, उसे लागू करने या पारस्परिक व्यापार समझौतों के माध्यम से ऐसे उपायों को प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता दिखाई है, उनके लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया गया है।
भारत बातचीत के जरिए समाधान चाहता है
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार सेक्शन 301 जांच के तहत राहत प्राप्त करने और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम टैरिफ सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका के साथ वार्ता पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, यदि भारत को “निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित” शर्तें मिलती हैं, तो दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि समझौते की व्यापक रूपरेखा तय होने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत दौरे पर आ सकते हैं।
जबरन श्रम के आरोपों को भारत ने किया खारिज
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने जबरन श्रम से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज किया है और अमेरिका से सेक्शन 301 की जांच समाप्त करने का आग्रह किया है।
भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान एकतरफा व्यापारिक उपायों के बजाय दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के दायरे में किया जाना चाहिए। भारत का मानना है कि व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए संवाद और आपसी सहमति का रास्ता अधिक प्रभावी होगा।
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