राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में खींचतान, झामुमो ने दोनों सीटों पर ठोका दावा

NEW SAGA DESK

रांची : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा बोकारो के प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद महागठबंधन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह दोनों सीटों पर अपना दावा छोड़ने के पक्ष में नहीं है।

कांग्रेस की ओर से प्रणव झा के नाम की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। पार्टी के भीतर भी उम्मीदवार चयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड की सक्रिय राजनीति में लंबे समय से नजर नहीं आने के कारण प्रणव झा को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गोड्डा के पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे नेताओं की उपेक्षा की जा रही है। उनके बयान के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चा और तेज हो गई है।

इधर, कांग्रेस उम्मीदवार की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर झामुमो की अहम बैठक हुई। बैठक में पार्टी के मंत्री, विधायक, सांसद और वरिष्ठ नेताओं ने राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की। बैठक के बाद नेताओं ने संकेत दिया कि झामुमो दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के पक्ष में है।

मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि झामुमो राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए दोनों सीटों पर उसका दावा बनता है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार चयन का अधिकार पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष को सौंप दिया गया है। कांग्रेस उम्मीदवार की घोषणा पर उन्होंने कहा कि झामुमो का रुख पहले से स्पष्ट है और पार्टी दोनों सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।

झामुमो विधायक बैद्यनाथ राम ने भी पार्टी का यही रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों, विधायकों और मंत्रियों की राय है कि दोनों सीटों पर झामुमो के उम्मीदवार मैदान में उतरें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सहमति लिए बिना उम्मीदवार की घोषणा की है।

झामुमो के इस रुख के बाद महागठबंधन की एकजुटता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस और झामुमो अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं तो इसे गठबंधन के भीतर बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा जाएगा।

फिलहाल सभी की निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस और झामुमो आपसी सहमति से समाधान निकालते हैं या राज्यसभा चुनाव में अलग-अलग दावेदारी पेश करते हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर शुरू हुआ यह विवाद झारखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर चुका है।

Read More News

Read More