बड़गाई जमीन मामले में हेमंत सोरेन को झटका, पीएमएलए कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की

NEWS SAGA DESK

रांची: झारखंड के चर्चित बड़गाई जमीन मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कानूनी झटका लगा है। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने उनकी ओर से दायर जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने कहा कि मामले में उपलब्ध दस्तावेज, साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया आरोपों की सुनवाई के लिए पर्याप्त हैं।

लोअर कोर्ट के अधिवक्ता संजय कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 3 जून को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 8 जून को सुनाया गया। उन्होंने कहा कि आरोप तय होने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गवाहों की गवाही शुरू होगी।

क्या है मामला?

यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ईसीआईआर संख्या 06/2023 से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार बड़गाई मौजा की करीब 8.86 एकड़ भूमि से संबंधित कथित अनियमित लेनदेन और दस्तावेजी हेरफेर की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

अदालत की टिप्पणी

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि डिस्चार्ज या जमानत याचिका पर विचार करते समय साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जाता। इस स्तर पर केवल यह देखा जाता है कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री आरोप तय करने के लिए पर्याप्त है या नहीं। अदालत के अनुसार ईडी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करते हैं।

जांच में क्या सामने आया?

ईडी की जांच में भूमि से जुड़े दस्तावेजों, रजिस्टरों और अन्य अभिलेखों की जांच की गई। जांच के दौरान राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के पास से 17 मूल रजिस्टर और भूमि संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए थे। ईडी का दावा है कि जमीन के कब्जे, नियंत्रण और उससे जुड़े लाभार्थियों के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए गए हैं।

अदालत ने अपने आदेश में गवाह संतोष मुंडा के बयान का भी उल्लेख किया है। आदेश के अनुसार, संतोष मुंडा लंबे समय तक संबंधित भूमि पर केयरटेकर के रूप में कार्यरत था और उसने जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई।

अब आगे क्या?

जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब मामले में आरोप तय करने और नियमित सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे और मुकदमे की सुनवाई शुरू होगी।

बड़गाई जमीन मामला झारखंड की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इसी प्रकरण में ईडी की कार्रवाई के बाद हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भी रहना पड़ा था। अब अदालत के ताजा फैसले के बाद इस मामले की सुनवाई नए चरण में प्रवेश करेगी।

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