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सीबीआई की विशेष अदालत का बड़ा फैसला, 2005-06 के भुरकुंडा-पतरातू सड़क नवीकरण मामले में ठेकेदार दोषी करार; छह अन्य अभियुक्त साक्ष्य के अभाव में बरी
Bitumen Scam Case(बिटुमेन) घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ठेकेदार झमन प्रसाद को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाने के साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी निर्धारित समय के भीतर जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह मामला वर्ष 2005-06 में भुरकुंडा-पतरातू सड़क खंड के लगभग छह किलोमीटर लंबे हिस्से के नवीकरण कार्य से जुड़ा हुआ है। सड़क निर्माण कार्य में उपयोग होने वाले अलकतरे (बिटुमेन) की खरीद को लेकर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए थे। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने इसे बड़े वित्तीय घोटाले के रूप में दर्ज किया था।

Alkatra Ghotalaसीबीआई की जांच में सामने आया था कि सड़क निर्माण परियोजना के लिए बिटुमेन की खरीद सरकारी एजेंसियों से की जानी थी, लेकिन निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए इसकी खरीद निजी एजेंसियों से की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताएं बरती गईं, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। जांच के दौरान करीब 20.23 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद सात लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था, जिनमें ठेकेदार के अलावा तत्कालीन कनीय और सहायक अभियंता भी शामिल थे। इसके बाद विशेष अदालत में लंबे समय तक मुकदमे की सुनवाई चली।
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुशील कुमार ने अदालत में कुल 14 गवाहों को पेश किया। अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य, सरकारी अभिलेखों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह साबित करने का प्रयास किया कि सड़क निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी कर वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद ठेकेदार झमन प्रसाद की भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित माना। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसी आधार पर उन्हें दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा और आर्थिक दंड दिया गया।
हालांकि, मामले में आरोपित अन्य छह अभियुक्तों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके चलते अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। बरी किए गए अभियुक्तों में तत्कालीन चार कनीय अभियंता और दो सहायक अभियंता शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, मामले में बरी किए गए अभियुक्तों में भुनेश्वर महतो वर्तमान में पथ प्रमंडल, गोड्डा में कनीय अभियंता के पद पर कार्यरत हैं, जबकि अन्य अभियंता सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके, इसलिए उन्हें दोषमुक्त किया जाता है।
झारखंड में अलकतरा घोटाला लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है और इससे जुड़े कई मामलों की जांच सीबीआई द्वारा की गई है। ताजा फैसले को भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण न्यायिक कदम माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से यह संदेश भी गया है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में वित्तीय गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई कर सकता है।
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करीब दो दशक पुराने इस मामले में आए फैसले ने एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से वर्षों पुराने मामलों में भी दोषियों को सजा दिलाई जा सकती है।
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