JPSC विवाद पर विधानसभा में विपक्ष का प्रदर्शन जारी। NDA ने सीबीआई जांच, छात्रों से वार्ता और राष्ट्रपति शासन की मांग उठाई, सरकार ने विपक्ष पर राजनीति का आरोप लगाया।
रांची: JPSC विवाद पर विधानसभा में हंगामा लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन कर राज्य सरकार को घेरा। विपक्ष ने जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं, छात्रों के आंदोलन और सरकार की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठाए। वहीं सरकार ने विपक्ष पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया और भरोसा दिलाया कि योग्य अभ्यर्थियों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
दूसरे दिन भी जारी रहा विपक्ष का प्रदर्शन
JPSC विवाद पर विधानसभा में हंगामा उस समय और तेज हो गया जब भाजपा और आजसू के विधायक विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। विपक्षी नेताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
भाजपा विधायक नीरा यादव ने कहा कि छात्र प्रतिनिधिमंडल बनाए जाने के बावजूद अब तक सरकार ने उनसे बातचीत नहीं की है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में लगातार भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थानों की परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में मैट्रिक परीक्षा के प्रश्नपत्र तक लीक हो चुके हैं, जिससे युवाओं का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। उनके अनुसार जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आजसू ने राष्ट्रपति शासन की मांग उठाई
JPSC विवाद पर विधानसभा में हंगामा के बीच आजसू पार्टी के विधायक तिवारी महतो ने राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अपने पद से इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच में सहयोग करना चाहिए।
तिवारी महतो ने आरोप लगाया कि जेपीएससी से जुड़े विवादों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सरकार ने विपक्ष पर लगाया राजनीति का आरोप
नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार छात्रों से संवाद के पक्ष में है, लेकिन आंदोलन को राजनीतिक मंच नहीं बनने दिया जाएगा।
उन्होंने छात्र प्रतिनिधिमंडल में पूर्व महाधिवक्ता के शामिल किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे वार्ता की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। मंत्री ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और कुछ कोचिंग संस्थान छात्रों के आंदोलन को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने आंदोलन की गरिमा बनाए रखें और राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रहें। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार योग्य अभ्यर्थियों के हितों की पूरी सुरक्षा करेगी।
जयराम महतो ने CBI और ED जांच की मांग की
डुमरी विधायक जयराम महतो ने भी पूरे मामले की जांच CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में कथित पैसों के लेनदेन की जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद गंभीर हैं।
उन्होंने दावा किया कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला हो सकता है। इसलिए आर्थिक पहलुओं की जांच के लिए ईडी की भूमिका भी आवश्यक है।
छात्रों और सरकार के बीच वार्ता का इंतजार
JPSC विवाद पर विधानसभा में हंगामा के बीच अब तक सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच औपचारिक वार्ता नहीं हो सकी है। इस पर जयराम महतो ने निराशा जताते हुए कहा कि सरकार चाहे तो कुछ घंटों की बातचीत में समाधान का रास्ता निकाल सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास सभी तथ्य मौजूद हैं और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
मामला क्यों बना बड़ा मुद्दा?
जेपीएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पिछले कुछ दिनों से छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि योग्य अभ्यर्थियों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जेपीएससी विवाद अब केवल भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह झारखंड की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन चुका है। विपक्ष जांच एजेंसियों से जांच और सरकार की जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार छात्रों के हित सुरक्षित रखने का आश्वासन दे रही है। अब सभी की नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच संभावित वार्ता तथा आगे होने वाले निर्णयों पर टिकी है।
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