Jagannath Rath Yatra 2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। देव स्नान यात्रा, अनवसर, नेत्रोत्सव और 16 जुलाई की रथयात्रा का पूरा कार्यक्रम जानें।
News Saga Desk
भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए बहुप्रतीक्षित Jagannath Rath Yatra 2026 महोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। सनातन परंपरा के अनुसार इस भव्य उत्सव का शुभारंभ देव स्नान यात्रा से होगा। स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा का विशेष अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद भगवान 15 दिनों तक अनवसर यानी एकांतवास में रहेंगे, जिसके दौरान श्रद्धालुओं को उनके दर्शन नहीं होंगे। यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम माना जाता है।
देव स्नान यात्रा से होगा महोत्सव का शुभारंभ
Jagannath Rath Yatra 2026 के तहत देव स्नान यात्रा का विशेष महत्व है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार स्नान यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दोपहर 1 बजे से स्नान यात्रा पूजा आरंभ होगी, जो लगभग 1:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद 1:50 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा।
भक्तों को भी इस अवसर पर भगवान का जलाभिषेक करने का अवसर मिलेगा। दोपहर 2 बजे से 3:30 बजे तक श्रद्धालु भगवान के अभिषेक में शामिल हो सकेंगे। कार्यक्रम के दौरान 108 मंगल आरती, जगन्नाथ अष्टकम और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ भी किया जाएगा, जिससे पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बनेगा।
53 पवित्र कलशों से होगा विशेष अभिषेक
इस वर्ष Jagannath Rath Yatra 2026 के अंतर्गत देव स्नान यात्रा के लिए 53 पवित्र कलश तैयार किए गए हैं। इन कलशों में गंगाजल, अश्वगंधा, मधु, हल्दी, इत्र और अन्य पूजन सामग्री मिश्रित की गई है।
धार्मिक विधि-विधान के अनुसार सबसे पहले भगवान बलभद्र का स्नान कराया जाएगा। इसके बाद माता सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ का विशेष अभिषेक होगा। भगवान का पंचगव्य, दूध, घी, शहद, गंगाजल और सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया जाएगा। इस आयोजन को देखने और उसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
स्नान पूर्णिमा के बाद क्यों होते हैं भगवान अनवसर में?
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा पर भगवान का विशेष अभिषेक होने के बाद वे अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी कारण भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा 15 दिनों के लिए अनवसर या एकांतवास में चले जाते हैं।

इस अवधि में मंदिर में भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होते हैं। श्रद्धालु केवल राधा-कृष्ण के दर्शन कर सकते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और Jagannath Rath Yatra 2026 के दौरान भी इसका पालन किया जाएगा। अनवसर की अवधि को भगवान के विश्राम और स्वास्थ्य लाभ का समय माना जाता है।
15 जुलाई को नेत्रोत्सव, 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा
अनवसर की अवधि समाप्त होने के बाद 15 जुलाई को भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस दिन भगवान के नेत्रों का विशेष श्रृंगार और पूजा की जाती है। इसके बाद 16 जुलाई को Jagannath Rath Yatra 2026 का मुख्य आयोजन होगा।
रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु रथ खींचने और भगवान के दर्शन करने के लिए उपस्थित रहते हैं। इसी दिन से दस दिवसीय मेले की भी शुरुआत होगी, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
नौ दिनों बाद होगी भगवान की वापसी
रथयात्रा के दौरान भगवान नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में प्रवास करेंगे। इसके बाद 25 जुलाई को उनकी वापसी यात्रा आयोजित होगी और वे पुनः मुख्य मंदिर में विराजमान होंगे।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय और व्यवस्था का पालन करते हुए धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लें। सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं ताकि सभी भक्त सुचारु रूप से दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकें।
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धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
सनातन परंपरा में स्नान पूर्णिमा से ही रथयात्रा महोत्सव का औपचारिक आरंभ माना जाता है। Jagannath Rath Yatra 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस महापर्व में भाग लेकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस वर्ष भी भक्तों में उत्साह का माहौल है और देव स्नान यात्रा से लेकर रथयात्रा तक सभी कार्यक्रमों को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
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