Shyama Prasad Mukherjee Statue के लिए जीराट में 125 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित होगी। 200 करोड़ रुपये की परियोजना में संग्रहालय और पुस्तकालय का विकास भी शामिल।
News Saga Desk
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले स्थित जीराट को जल्द ही एक नई पहचान मिलने जा रही है। Shyama Prasad Mukherjee Statue परियोजना के तहत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर उनके पैतृक गांव जीराट (बलागढ़) में 125 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनाई गई है। राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
सरकार का मानना है कि Shyama Prasad Mukherjee Statue परियोजना न केवल क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को बढ़ाएगी, बल्कि पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय विकास को भी नई दिशा देगी। प्रतिमा के साथ संग्रहालय, ऑडिटोरियम और पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण की भी व्यापक योजना बनाई गई है।
जीराट को मिलेगी नई ऐतिहासिक पहचान
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति, शिक्षा और सामाजिक जीवन के प्रमुख व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। उनके पैतृक गांव जीराट का ऐतिहासिक महत्व लंबे समय से चर्चा में रहा है।
अब Shyama Prasad Mukherjee Statue के निर्माण के जरिए इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने परियोजना के लिए तीन संभावित स्थलों का निरीक्षण किया है और उपयुक्त स्थान के चयन की प्रक्रिया जारी है।
जानकारों का मानना है कि प्रस्तावित मिनी बंदरगाह परियोजना के साथ यह योजना जीराट और बलागढ़ क्षेत्र के विकास को नई गति दे सकती है।
125 फीट ऊंची प्रतिमा होगी आकर्षण का केंद्र
परियोजना का सबसे प्रमुख हिस्सा 125 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण है। यह प्रतिमा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती को समर्पित होगी।
Shyama Prasad Mukherjee Statue को आधुनिक तकनीक और वास्तुकला के आधार पर विकसित किए जाने की योजना है ताकि यह पश्चिम बंगाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सके।
फिलहाल जीराट बस स्टैंड और असम लिंक रोड के आसपास की जमीनों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। अंतिम स्थल चयन के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
संग्रहालय और पुस्तकालय का भी होगा विकास
सरकार की योजना केवल प्रतिमा निर्माण तक सीमित नहीं है। परियोजना के तहत सर आशुतोष मुखर्जी द्वारा स्थापित विद्यालय और पुस्तकालय के जीर्णोद्धार का भी प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अलावा Shyama Prasad Mukherjee Statue परियोजना में डॉ. मुखर्जी के नाम पर एक आधुनिक पुस्तकालय स्थापित करने की योजना है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके जीवन, विचारों और योगदान से परिचित कराना है।
पुस्तकालय में शोध सामग्री, ऐतिहासिक दस्तावेज और डिजिटल संसाधनों की व्यवस्था भी की जा सकती है, जिससे यह शिक्षा और अनुसंधान का केंद्र बन सके।
पैतृक घर को संग्रहालय में बदलने की तैयारी
परियोजना के तहत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भाई बामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक घर को संग्रहालय में विकसित करने की योजना बनाई गई है।

इस संग्रहालय में मुखर्जी परिवार से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज, दुर्लभ तस्वीरें, व्यक्तिगत वस्तुएं और उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी।
Shyama Prasad Mukherjee Statue परियोजना के माध्यम से सरकार ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने और उन्हें आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
परिवार ने किया सरकार की पहल का स्वागत
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के वंशजों ने राज्य सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। उनके वंशज बाणी प्रसाद मुखर्जी और पोती दीपान्विता मुखर्जी ने परियोजना को ऐतिहासिक कदम बताया है।
बाणी प्रसाद मुखर्जी ने कहा कि सरकार यदि पैतृक घर का अधिग्रहण कर संग्रहालय बनाना चाहती है तो परिवार इस कार्य में पूरा सहयोग करेगा। वहीं दीपान्विता मुखर्जी ने कहा कि यह पहल इतिहास और विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
Shyama Prasad Mukherjee Statue को लेकर परिवार की सकारात्मक प्रतिक्रिया से परियोजना को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की क्या है योजना?
बलागढ़ की विधायक एवं राज्य मंत्री सुमना सरकार ने बताया कि मुखर्जी परिवार के सदस्यों के साथ इस संबंध में विस्तृत चर्चा हो चुकी है। उनकी संपत्तियों के सरकारी अधिग्रहण की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बामा प्रसाद मुखर्जी के घर को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही जीराट अस्पताल का नाम बदलने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है।
सरकार का लक्ष्य जीराट को एक ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है, जहां देशभर से लोग आकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान को समझ सकें।
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राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व
उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक निवास के विकास का वादा किया था। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब उस वादे को जमीन पर उतारने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं।
Shyama Prasad Mukherjee Statue परियोजना को राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि योजना निर्धारित समय पर पूरी होती है, तो जीराट पश्चिम बंगाल के प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।
यह परियोजना केवल एक प्रतिमा निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व की विरासत को संरक्षित करने का प्रयास है, जिन्होंने भारतीय राजनीति, शिक्षा और राष्ट्रीय जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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