जादूगोड़ा के युवा फिल्मकार रवि राज मुर्मू को संथाली शॉर्ट फिल्म ‘आंगेन’ के लिए बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। रांची एयरपोर्ट पर स्वागत हुआ।
News Saga Desk
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा के युवा फिल्मकार रवि राज मुर्मू ने अपनी पहली ही फिल्म से राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का नाम रोशन किया है। उनकी शॉर्ट संथाली फिल्म ‘आंगेन’ के लिए उन्हें बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। गुजरात में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने के बाद बुधवार को रवि राज मुर्मू के रांची पहुंचने पर बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत किया गया। संथाल सिने एसोसिएशन और झारखंड के स्थानीय कलाकारों ने उनका स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की।
पहली फिल्म में ही राष्ट्रीय पुरस्कार
रवि राज मुर्मू अपनी पहली फिल्म पर राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी समाज में कला और संस्कृति गहराई से जुड़ी हुई है। उनके अनुसार, गीत, संगीत और नृत्य आदिवासी समाज की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।
उन्होंने अपने इस सम्मान को संथाली समाज और झारखंड के लोगों को समर्पित किया। रवि राज मुर्मू ने कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ संथाली समाज और झारखंड के कलाकारों के लिए भी सम्मान है।
क्या है ‘आंगेन’ का मतलब?
रवि राज मुर्मू ने अपनी फिल्म ‘आंगेन’ की कहानी के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘आंगेन’ का अर्थ अदृश्य या Invisible होता है।
फिल्म एक लोककथा पर आधारित है। इसकी कहानी एक चरवाहे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक देवी से प्रेम हो जाता है। लोककथा, आदिवासी संस्कृति और संथाली समाज की पृष्ठभूमि से जुड़ी इस कहानी को फिल्म के माध्यम से पर्दे पर पेश किया गया है।
एयरपोर्ट पर कलाकारों ने किया स्वागत
राष्ट्रीय पुरस्कार लेकर रांची पहुंचे रवि राज मुर्मू के स्वागत के लिए बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर संथाल सिने एसोसिएशन और स्थानीय कलाकार मौजूद रहे। इस दौरान कलाकारों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी और उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई।
रवि राज मुर्मू की उपलब्धि को झारखंड के क्षेत्रीय और खासकर संथाली सिनेमा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहली ही फिल्म में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से युवा फिल्मकारों के बीच भी उत्साह बढ़ा है।
संथाली सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि
रवि राज मुर्मू का राष्ट्रीय पुरस्कार संथाली भाषा और झारखंड की स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। ‘आंगेन’ के जरिए लोककथा और आदिवासी सांस्कृतिक परिवेश को फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
रवि राज मुर्मू ने अपनी सफलता का श्रेय संथाली समाज और झारखंड के कलाकारों को देते हुए कहा कि वह इस सम्मान को अपने समाज के नाम समर्पित करते हैं।
No Comment! Be the first one.