Telegram Username Feature और Signal Username Feature को लेकर सरकार ने जवाब मांगा है। साथ ही कथित iPhone 18 Pro Data Leak मामले की भी जांच जारी है।
News Saga Desk
केंद्र सरकार ने Telegram Username Feature और Signal के यूजरनेम सिस्टम को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फर्जी पहचान, साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी की बढ़ती घटनाओं के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने दोनों मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से इस फीचर से जुड़े सुरक्षा उपायों और इसकी आवश्यकता पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकार पहले ही व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर सवाल उठा चुकी है और उसके लॉन्च को फिलहाल रोकने के लिए कहा है।
सरकार का मानना है कि Telegram Username Feature जैसे विकल्प जहां एक ओर यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ा सकते हैं, वहीं दूसरी ओर इनका दुरुपयोग कर साइबर अपराधी फर्जी पहचान बनाकर लोगों को निशाना भी बना सकते हैं। इसी कारण मंत्रालय ने कंपनियों से विस्तृत जानकारी मांगी है।
Telegram Username Feature पर सरकार की चिंता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टेलीग्राम से पूछा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध Telegram Username Feature को जारी रखने की वास्तविक आवश्यकता क्या है। मंत्रालय यह भी जानना चाहता है कि इस फीचर के माध्यम से होने वाली संभावित धोखाधड़ी, पहचान छिपाने और साइबर अपराधों को रोकने के लिए कंपनी ने कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।
सरकार का मानना है कि यदि किसी प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ता केवल यूजरनेम के आधार पर संपर्क स्थापित कर सकते हैं, तो इससे फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित करने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में साइबर अपराधियों की पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
Signal से भी मांगा गया विस्तृत जवाब
सरकार ने केवल टेलीग्राम ही नहीं बल्कि सिग्नल से भी इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। Signal को भेजे गए नोटिस में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उसके यूजरनेम फीचर के तहत उपयोगकर्ताओं की पहचान सत्यापित करने और धोखाधड़ी रोकने के लिए कौन से तंत्र मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाले प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम आधारित पहचान व्यवस्था गोपनीयता को मजबूत करती है, लेकिन यदि पर्याप्त सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं हों तो यह साइबर अपराधियों के लिए अवसर भी बन सकती है।
WhatsApp Username Feature को लेकर भी सरकार सतर्क
हाल ही में केंद्र सरकार ने मेटा से कहा था कि वह भारत में व्हाट्सएप के नए यूजरनेम फीचर को फिलहाल लॉन्च न करे। मंत्रालय ने कंपनी को तीन दिनों के भीतर इस फीचर की विस्तृत जानकारी देने और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर चर्चा पूरी होने तक इसे लागू नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

व्हाट्सएप ने अपने जवाब में कहा है कि उसके यूजरनेम सिस्टम में कई सुरक्षा परतें शामिल की गई हैं। कंपनी के अनुसार, उपयोगकर्ता बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए केवल एक यूनिक यूजरनेम के माध्यम से संपर्क स्थापित कर सकेंगे। कंपनी का दावा है कि इससे गोपनीयता बढ़ेगी और फर्जी गतिविधियों को रोकने के लिए आवश्यक तकनीकी उपाय पहले से मौजूद हैं।
साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से क्यों महत्वपूर्ण है मामला
डिजिटल संचार के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, सोशल मीडिया स्कैम और पहचान चोरी जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि Telegram Username Feature और अन्य समान सुविधाएं अपराधियों के लिए नया माध्यम न बन जाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूजरनेम आधारित पहचान प्रणाली में सत्यापन प्रक्रिया, रिपोर्टिंग सिस्टम, संदिग्ध खातों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई जैसे सुरक्षा उपाय बेहद आवश्यक हैं। यदि इन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया तो ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि हो सकती है।
iPhone 18 Pro Data Leak मामले की भी जांच जारी
इस बीच इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले पर भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार कथित iPhone 18 Pro Data Leak मामले की जांच कर रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से कथित रूप से चोरी हुए दस्तावेजों से जुड़ा हुआ है। इन दस्तावेजों में ऐप्पल के अभी तक लॉन्च नहीं हुए iPhone 18 Pro से संबंधित जानकारी होने की आशंका जताई गई है। सरकार इस पूरे मामले की जांच कर रही है और तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।
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आम लोगों के लिए क्या है संदेश
सरकार की यह पहल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी अनजान यूजरनेम से प्राप्त संदेशों पर तुरंत भरोसा न करें और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करें।
आने वाले दिनों में Telegram, Signal और WhatsApp की ओर से दिए जाने वाले जवाबों के आधार पर सरकार आगे की रणनीति तय कर सकती है। वहीं, iPhone 18 Pro Data Leak मामले की जांच के नतीजों पर भी तकनीकी उद्योग की नजर बनी हुई है।
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