पीएलएफआई के पूर्व सदस्य राजन राम हत्याकांड में 1 अगस्त को आएगा फैसला, रांची अदालत ने निर्णय रखा सुरक्षित

NEWS SAGA DESK

रांची की अदालत 1 अगस्त को पीएलएफआई के पूर्व सदस्य राजन राम हत्याकांड मामले में फैसला सुनाएगी। जानें मामले की पूरी पृष्ठभूमि, आरोप, ट्रायल और कोर्ट की कार्रवाई।

प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के पूर्व सदस्य राजन राम हत्याकांड मामले में रांची की अदालत एक अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी। रांची के अपर न्यायायुक्त अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने मामले में सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। अब इस बहुचर्चित मामले में अदालत का अंतिम फैसला 1 अगस्त को आएगा।

यह मामला वर्ष 2018 में हुई राजन राम की हत्या से जुड़ा है, जिसने उस समय क्षेत्र में काफी चर्चा बटोरी थी। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि संगठन छोड़ने के कारण पीएलएफआई के उग्रवादियों ने राजन राम की हत्या की थी।

ट्रायल पूरा, अदालत ने फैसला रखा सुरक्षित

मामले की सुनवाई के दौरान एकमात्र आरोपी याकूब केरकेट्टा का दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किया गया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

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इस मामले में याकूब केरकेट्टा ही एकमात्र आरोपी है, जो मुकदमे का सामना कर रहा है। वहीं, मामले के अन्य पांच आरोपितों को पर्याप्त साक्ष्य और गवाहों के अभाव में अदालत पहले ही बरी कर चुकी है।

कौन थे राजन राम?

अभियोजन के अनुसार, खूंटी जिले के कर्रा थाना क्षेत्र के छोटका रेगड़े गांव निवासी राजन राम कभी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई से जुड़े हुए थे। संगठन में सक्रिय रहने के दौरान उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा था।

हालांकि जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने उग्रवादी गतिविधियों से दूरी बना ली और सामान्य जीवन जीने का फैसला किया। परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने संगठन छोड़ दिया और अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिताने लगे।

बताया गया कि दो बच्चों के पिता बनने के बाद राजन राम ने पीएलएफआई से पूरी तरह नाता तोड़ लिया और शांति सेना से जुड़ गए। अभियोजन का दावा है कि संगठन छोड़ने के कारण पीएलएफआई के दस्ता सदस्य उनसे नाराज थे।

अभियोजन के अनुसार, 17 मार्च 2018 को राजन राम अपनी पत्नी से बड़काकुरा गांव जाने की बात कहकर घर से निकले थे। उसी दिन शाम करीब सात बजे कथित तौर पर तिलकेश्वर गोप और याकूब केरकेट्टा के दस्ते ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया।

राजन राम की हत्या के बाद उनकी पत्नी सुनीता देवी के बयान के आधार पर लापुंग थाना में कांड संख्या 12/2018 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न पहलुओं पर साक्ष्य जुटाए और अनुसंधान पूरा करने के बाद आरोपितों के विरुद्ध अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। ट्रायल के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण पांच आरोपितों को अदालत ने पहले ही बरी कर दिया था।

1 अगस्त को आएगा अंतिम फैसला

अब इस मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। 1 अगस्त को अदालत यह तय करेगी कि एकमात्र आरोपी याकूब केरकेट्टा के खिलाफ अभियोजन पक्ष आरोप साबित कर पाता है या नहीं।

इस फैसले पर राजन राम के परिजनों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय लोगों की भी नजरें टिकी हैं। अदालत का निर्णय इस बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम चरण होगा।

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