करम पर्व-लोकधरोहर Audio-Visual प्रतियोगिता 2026 का शुभारंभ, युवाओं को मिलेगा अपनी संस्कृति रिकॉर्ड करने का मंच

रांची में करम पर्व-लोकधरोहर Audio-Visual प्रतियोगिता 2026 का शुभारंभ हुआ। 11 अक्टूबर तक वीडियो भेज सकेंगे प्रतिभागी, विजेता को ₹11 हजार पुरस्कार।

झारखंड की समृद्ध जनजातीय और लोक संस्कृति से जुड़ी करम परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। प्राचीन करम गीतों, देवलोक कथाओं, पारंपरिक वाद्यों, करम धुनों, नृत्य-अनुष्ठानों और मौखिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से “करम पर्व–लोकधरोहर Audio-Visual प्रतियोगिता–2026” का रांची के मोराबादी स्थित रामकृष्ण मिशन सभागार में विधिवत शुभारंभ किया गया।

इस पहल के जरिए झारखंड की जीवंत लोक एवं जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को Audio-Visual माध्यम से दस्तावेजीकृत करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

पोस्टर का हुआ लोकार्पण

कार्यक्रम में रांची की महापौर रौशनी खलखो, रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी भावेशानंद जी, आदि संस्कृति मंच के धीरेन्द्र कुमार और वरिष्ठ समाजसेवी रूपम झा मौजूद रहे।

इस अवसर पर करम पर्व-लोकधरोहर Audio-Visual प्रतियोगिता 2026 के पोस्टर का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में झारखंड की लोक और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा उसे युवा पीढ़ी से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

सिर्फ गीत नहीं, पूरी करम परंपरा होगी रिकॉर्ड

आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल करम गीतों की प्रस्तुति कराना नहीं है। इसके तहत गांवों और समुदायों में पीढ़ियों से संरक्षित करम गीत, करम देव एवं देवलोक से जुड़ी कथाएं, पारंपरिक वाद्य और धुन, नृत्य, अनुष्ठान, लोकविश्वास तथा बुजुर्ग ज्ञानधारकों की स्मृतियों को Audio-Visual स्वरूप में दस्तावेजीकृत किया जाएगा।

इसके माध्यम से युवा अपने गांव और समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को खोजने, समझने और उसे रिकॉर्ड करने के लिए प्रेरित होंगे।

पूरे झारखंड से ऑनलाइन भेज सकेंगे प्रविष्टियां

करम पर्व-लोकधरोहर Audio-Visual प्रतियोगिता 2026 पूरे झारखंड के लिए आयोजित की जा रही है। इसमें जनजातीय एवं लोक कलाकार, ग्राम-सांस्कृतिक दल, युवा, विद्यार्थी, शोधार्थी और संस्कृति प्रेमी ऑनलाइन भाग ले सकते हैं।

प्रविष्टियों के मूल्यांकन में सांस्कृतिक प्रामाणिकता, करम गीत एवं कथा, पारंपरिक वाद्य-धुन, नृत्य-अनुष्ठान, ज्ञानधारकों के कथन और Audio-Visual Documentation की गुणवत्ता को महत्व दिया जाएगा।

प्रथम पुरस्कार ₹11 हजार, 10 प्रतिभागियों को भी सम्मान

प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं। प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹11,000, द्वितीय पुरस्कार ₹7,100 और तृतीय पुरस्कार ₹5,100 दिया जाएगा।

इसके अलावा 10 श्रेष्ठ रचनाओं को ₹1,100 प्रति प्रविष्टि सहभागिता पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।

चयनित सामग्री को संबंधित कलाकारों और समुदाय की सहमति के आधार पर “लोकधरोहर” डिजिटल अभिलेखागार में संरक्षित करने का भी प्रयास किया जाएगा।

11 अक्टूबर तक भेज सकेंगे वीडियो

प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए वीडियो भेजने की अंतिम तिथि 11 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। प्राप्त प्रविष्टियों की समीक्षा और चयन के बाद 31 अक्टूबर 2026, शनिवार को रांची में राज्यस्तरीय समापन एवं पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा।

युवाओं और कलाकारों से खास अपील

आयोजकों ने झारखंड के अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं, कलाकारों, सांस्कृतिक संगठनों और पारंपरिक ज्ञानधारकों से प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की है।

आयोजकों का कहना है कि गांवों में आज भी कई ऐसी प्राचीन करम परंपराएं जीवित हैं, जो मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती रही हैं। इन परंपराओं का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर साबित हो सकता है।

“हमारा करम – हमारी संस्कृति, हमारी धरोहर” के संदेश के साथ शुरू किए गए इस अभियान का लक्ष्य करम से जुड़ी जीवंत सांस्कृतिक स्मृतियों को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ते हुए भविष्य के लिए सुरक्षित करना है।

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