पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में लोक भवन मार्च पर निकले। सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की।
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को पटना विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र संगठनों ने संयुक्त रूप से लोक भवन तक पैदल मार्च निकालकर सरकार के फैसले का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और प्रशासनिक अधिकार राज्य सरकार के अधीन चले जाएंगे।
पटना विश्वविद्यालय परिसर से शुरू हुआ यह मार्च लोक भवन तक पहुंचा। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से विधेयक वापस लेने और विश्वविद्यालय की स्वायत्त व्यवस्था को बरकरार रखने की मांग की।

शिक्षकों ने क्यों जताया विरोध?
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक लागू होने के बाद कॉलेजों में प्रोफेसरों की नियुक्ति, स्थानांतरण और प्रशासनिक नियंत्रण सहित कई महत्वपूर्ण अधिकार राज्य सरकार के अधीन चले जाएंगे।
उनका कहना है कि इससे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली प्रभावित होगी और उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता कमजोर पड़ जाएगी।
विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर उठाए सवाल
शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय एक स्वायत्त संस्थान होता है और राज्यपाल उसके कुलाधिपति होते हैं। ऐसे में कॉलेजों के प्रशासनिक अधिकार विश्वविद्यालय से अलग करना न केवल विश्वविद्यालय की स्वायत्त व्यवस्था को कमजोर करेगा, बल्कि कुलाधिपति के अधिकारों पर भी असर डालेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संयुक्त मोर्चा बनाकर किया प्रदर्शन
पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ, कर्मचारी संघ, कॉलेज कर्मचारी संघ और छात्र संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर आंदोलन शुरू किया है।
संगठनों का कहना है कि पटना विश्वविद्यालय अधिनियम अन्य विश्वविद्यालयों से अलग है। इसलिए उसकी प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
सामूहिक अवकाश पर शिक्षक और कर्मचारी
आंदोलन के तहत शिक्षक और कर्मचारी मंगलवार से सामूहिक अवकाश पर हैं।
इससे पहले सीनेट हॉल के बाहर भी शिक्षकों और कर्मचारियों ने धरना दिया था। प्रदर्शन के दौरान “विश्वविद्यालय को सचिवालय नहीं बनने देंगे” और सरकार के फैसले के विरोध में नारे लगाए गए। इस आंदोलन में करीब 350 शिक्षक, कर्मचारी संगठनों के सदस्य और छात्र प्रतिनिधियों सहित लगभग एक हजार लोग शामिल हुए।
आगे आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारी संगठनों ने पहले ही विधानसभा घेराव और राजभवन मार्च की चेतावनी दी थी। उसी क्रम में गुरुवार को लोक भवन मार्च आयोजित किया गया।
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प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक वापस लेने, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखने और शिक्षकों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। बिहार सरकार द्वारा निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 लाए जाने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में इसका विरोध शुरू हो गया है। शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक अधिकार प्रभावित होंगे।
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