Jagannathpur Temple Audit मामले में झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर। मंदिर न्यास समिति के स्पेशल और फॉरेंसिक ऑडिट, GST नियमों और बैंक खाते की जांच की मांग।
News Saga Desk
रांची स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति (Jagannathpur Temple Audit) की कार्यप्रणाली और वित्तीय लेनदेन को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में मंदिर न्यास समिति के विशेष (स्पेशल) और फॉरेंसिक ऑडिट कराने, वित्तीय अभिलेखों की स्वतंत्र जांच और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई गंभीर आरोपों की जांच कराने की मांग की गई है।
धुर्वा निवासी अजय कुमार द्वारा दायर इस जनहित याचिका में राज्य सरकार, जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति, केनरा बैंक और अन्य संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। फिलहाल मामले पर उच्च न्यायालय में सुनवाई होना बाकी है।
फॉरेंसिक ऑडिट की मांग क्यों?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि Jagannathpur Temple Audit की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि मंदिर न्यास समिति वित्तीय मामलों में पारदर्शिता नहीं बरत रही है। याचिकाकर्ता का दावा है कि समिति वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रही और वित्तीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि मंदिर के सभी वित्तीय दस्तावेज, आय-व्यय का पूरा ब्योरा, दानपात्र से प्राप्त राशि और उससे जुड़े अभिलेखों की विशेष एवं फॉरेंसिक जांच कराई जाए ताकि किसी भी संभावित अनियमितता की सच्चाई सामने आ सके।
बैंक खाते को लेकर भी गंभीर आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मंदिर न्यास समिति का बैंक खाता कथित रूप से गलत पैन (PAN) के आधार पर संचालित किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बैंक खातों के सत्यापन और संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। आरोप है कि केनरा बैंक ने भी आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया का पालन नहीं किया और कथित तौर पर मंदिर पुनर्निर्माण समिति के पैन के आधार पर खाते का संचालन होने दिया।
हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक बैंक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मंदिर के रिकॉर्ड प्रशासनिक नियंत्रण में देने की मांग
Jagannathpur Temple Audit से जुड़ी याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि मंदिर न्यास समिति के सभी लेखा-जोखा, बुक्स ऑफ अकाउंट, दानपात्र और दान से जुड़े रिकॉर्ड तत्काल किसी स्वतंत्र प्रशासनिक अधिकारी के नियंत्रण में सौंप दिए जाएं।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इससे दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की आशंका समाप्त हो जाएगी।
वर्तमान न्यास समिति का प्रबंधन वापस लेने की मांग
याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि आरोपों की जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं सामने आती हैं तो मंदिर के प्रबंधन का अधिकार वर्तमान न्यास समिति से वापस लिया जाए।
साथ ही अदालत से विशेष (Special Audit) और Forensic Audit कराने के निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है ताकि वित्तीय लेनदेन और दान राशि के उपयोग की पूरी जांच हो सके।
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फिलहाल सुनवाई बाकी
मामले में अभी झारखंड उच्च न्यायालय ने सुनवाई शुरू नहीं की है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर राज्य सरकार, जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति, केनरा बैंक और अन्य प्रतिवादियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
अदालत में सुनवाई के दौरान सभी पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
रांची का जगन्नाथपुर मंदिर झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर न्यास समिति मंदिर के प्रशासन, दान प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन करती है। अब इसकी वित्तीय पारदर्शिता को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।
यदि उच्च न्यायालय विशेष या फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश देता है, तो मंदिर न्यास समिति के वित्तीय रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच हो सकती है। इससे धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश जाएगा।
फिलहाल झारखंड उच्च न्यायालय ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई नहीं की है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर राज्य सरकार, जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति, केनरा बैंक या अन्य प्रतिवादियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
- यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
- याचिका में लगाए गए आरोपों पर अभी न्यायिक निर्णय नहीं आया है।
- सभी पक्षों का जवाब और अदालत की सुनवाई के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
- नागरिक केवल आधिकारिक न्यायिक और प्रशासनिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
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