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जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में सीआईडी ने दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जेपीएससी कर्मचारी सोनू कुमार और अभय तिवारी के सहयोगी अरविन्द कुमार की गिरफ्तारी के साथ अब तक कुल 10 आरोपित पकड़े जा चुके हैं।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए शनिवार को दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया। ताजा गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
सीआईडी के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपितों में जेपीएससी का कर्मचारी सोनू कुमार और मामले के मुख्य आरोपित अभय कुमार तिवारी का करीबी सहयोगी अरविन्द कुमार शामिल हैं। दोनों से पूछताछ की जा रही है और जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं का नेटवर्क कितना व्यापक था तथा इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
22 जुलाई को दर्ज हुआ था मामला
सीआईडी ने इस मामले में 22 जुलाई 2026 को सीआईडी थाना में कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया था। मामला दर्ज होने के बाद से जांच एजेंसी लगातार कार्रवाई कर रही है। प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर कई लोगों से पूछताछ की गई और इसके बाद एक के बाद एक गिरफ्तारियां की गईं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा केवल परीक्षा संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की हेराफेरी या मिलीभगत के साक्ष्य जुटाए जा सकें।
अब तक 10 आरोपित गिरफ्तार
सीआईडी की ओर से अब तक कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए आरोपितों में टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के कर्मचारी हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल से जुड़े रामवीर सिंह, मो. उस्मान, मो. एबाद तथा मामले के मुख्य आरोपित अभय कुमार तिवारी शामिल हैं।
शनिवार को हुई नई कार्रवाई में जेपीएससी कर्मचारी सोनू कुमार और अभय तिवारी के सहयोगी अरविन्द कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को उम्मीद है कि मामले से जुड़े कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान प्राप्त दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कई अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जरूरत पड़ने पर आगे भी पूछताछ और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि परीक्षा से संबंधित गोपनीय सूचनाओं का दुरुपयोग किस स्तर तक हुआ और इसमें किन संस्थाओं या व्यक्तियों की संलिप्तता रही।
जेपीएससी राज्य की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्थाओं में से एक है। ऐसे में परीक्षा अनियमितता के आरोपों ने अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। लाखों उम्मीदवार इन परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी सेवा में चयन की उम्मीद रखते हैं। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच को लेकर अभ्यर्थियों और आम जनता की नजरें सीआईडी की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में दोषियों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होती है, तो इससे भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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