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मौजा मजगे के बस्तीवासियों ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर किया विरोध, भूमि अभिलेख में कथित बदलाव की निष्पक्ष जांच और दोबारा पैमाइश की मांग।

पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर अनुमंडल अंतर्गत मौजा मजगे, वार्ड संख्या-10 के बड़ी संख्या में बस्तीवासी मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भूमि सुधार उप समाहर्ता (एलआरओसी) के नाम ज्ञापन सौंपकर भूमि अभिलेखों में कथित बदलाव की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इस प्रदर्शन का नेतृत्व झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के जिला अध्यक्ष तपन महतो और जिला सचिव दिपाली दास ने किया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भूमि अभिलेखों में बिना स्पष्ट वैधानिक आदेश और पर्याप्त आधार के बदलाव किया गया है, जिससे कई परिवारों के भूमि संबंधी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। Jamshedpur Land Record Dispute अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
भूमि अभिलेख में बदलाव का आरोप
ज्ञापन के अनुसार, खाता संख्या-312 के प्लॉट संख्या 1552 और 1553 से संबंधित भूमि अभिलेखों में वर्ष 2026 के दौरान बदलाव किया गया। बस्तीवासियों का कहना है कि पुराने नक्शे, सेटलमेंट रिकॉर्ड और वर्ष 2022 तक अंचल कार्यालय के अभिलेखों में सामुदायिक भूमि को छोड़कर सभी आवासीय भूखंड प्लॉट संख्या 1552 में दर्ज थे।
उनका दावा है कि वर्ष 2022 में अंचलाधिकारी ने भी इसी प्लॉट को मान्यता दी थी। इसके बावजूद बाद में रिकॉर्ड में परिवर्तन कर कई मकानों को प्लॉट संख्या 1553 में दर्ज कर दिया गया।
अमीन की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
Jamshedpur Land Record Dispute को लेकर प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रतिनियुक्त अमीन सूरज कुमार की रिपोर्ट के आधार पर अभिलेखों में बदलाव किया गया।
बस्तीवासियों का कहना है कि जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमांकन और भौतिक स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हुआ। ऐसे में बिना स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया अपनाए रिकॉर्ड में संशोधन करना गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जेएलकेएम के जिला अध्यक्ष तपन महतो और जिला सचिव दिपाली दास ने कहा कि इस बदलाव से लगभग दो सौ परिवार प्रभावित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि बस्तीवासियों को उनकी भूमि से जुड़े अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पुराने नक्शे, सेटलमेंट रिकॉर्ड, खतियान और वर्तमान स्थिति का मिलान करते हुए सभी संबंधित पक्षों की मौजूदगी में दोबारा पैमाइश कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता सामने आती है तो अभिलेखों में आवश्यक संशोधन कर वास्तविक स्थिति के अनुरूप प्लॉट संख्या बहाल की जाए।
प्रदर्शन के दौरान बस्तीवासियों ने अपने दावों के समर्थन में कई दस्तावेज भी प्रशासन को सौंपे। इनमें पुराने नक्शे, सेटलमेंट रिकॉर्ड, वर्ष 2022 के अंचल कार्यालय के अभिलेख तथा वर्ष 2026 के विवादित रिकॉर्ड की प्रतियां शामिल हैं।
आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बस्तीवासियों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन सभी उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों की जांच कर निष्पक्ष निर्णय लेगा।
Jamshedpur Land Record Dispute को लेकर लोगों का कहना है कि यदि जांच पारदर्शी तरीके से होती है तो भूमि से जुड़े विवाद का समाधान निकल सकता है और प्रभावित परिवारों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच के परिणाम पर टिकी हुई है।
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