बिहार में ट्रांसजेंडर आरक्षण लागू। सरकारी नौकरियों में हर 500 पद पर 1 सीट रिजर्व होगी। पुलिस भर्ती में महिला अभ्यर्थियों जैसे नियम और आयु सीमा में विशेष छूट मिलेगी।
बिहार में ट्रांसजेंडर आरक्षण पर सरकार का बड़ा फैसला
बिहार में ट्रांसजेंडर आरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में होने वाली सरकारी भर्तियों में प्रत्येक 500 पदों पर एक पद ट्रांसजेंडर (तृतीय लिंग) अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेगा। सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और भर्ती एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।
इस फैसले के बाद भर्ती विज्ञापनों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आरक्षित पदों का अलग से उल्लेख किया जाएगा, जिससे अभ्यर्थियों को स्पष्ट जानकारी मिल सके।

सभी विभागों को जारी किए गए निर्देश
बिहार में ट्रांसजेंडर आरक्षण लागू करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के सचिव, विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों (डीएम) और विभिन्न भर्ती एजेंसियों को निर्देश भेज दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की विभिन्न सेवाओं और सरकारी नियुक्तियों में ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित आरक्षित पद उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य सरकारी नौकरियों में इस समुदाय की भागीदारी बढ़ाना और समान अवसर सुनिश्चित करना है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया निर्णय
सरकार का यह फैसला पटना हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्ताव पर सहमति जताई।
सरकार ने इस नीति के तहत किन्नर, कोठी और ट्रांसजेंडर समुदाय को “थर्ड जेंडर” श्रेणी में शामिल किया है, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिल सके।
पुलिस भर्ती में भी मिलेगा समान अवसर
नई व्यवस्था के अनुसार बिहार में ट्रांसजेंडर आरक्षण का लाभ पुलिस भर्ती में भी मिलेगा। ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक मापदंड और शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Efficiency Test) के नियम महिला अभ्यर्थियों के समान होंगे।
सरकार का मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक समावेशी बनेगी और ट्रांसजेंडर समुदाय के योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर प्राप्त होंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर समुदाय से योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं, तो संबंधित आरक्षित पद को अगले भर्ती चक्र के लिए सुरक्षित नहीं रखा जाएगा।
ऐसी स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार उस पद को संबंधित वैकल्पिक श्रेणी के पात्र अभ्यर्थी से भरा जाएगा। साथ ही ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) अभ्यर्थियों के समान छूट प्रदान की जाएगी।
समावेशी भर्ती की दिशा में कदम
देश में ट्रांसजेंडर समुदाय को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों और केंद्र तथा राज्यों की नीतियों के बाद कई राज्यों ने इस दिशा में पहल की है।
बिहार सरकार का यह निर्णय भी सरकारी सेवाओं में समान अवसर और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसे भी देखें...रांची में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस, जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर छात्रा ने लगाए बड़े आरोप
बिहार में ट्रांसजेंडर आरक्षण लागू होने से ट्रांसजेंडर समुदाय के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में प्रवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे रोजगार के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी नीतियां विविधता और समान प्रतिनिधित्व को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सरकार की नई व्यवस्था
राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों और भर्ती एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। नई नीति के अनुसार भर्ती विज्ञापनों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आरक्षित पदों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा और चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होगी।
No Comment! Be the first one.