Bhiwandi Building Collapse में मरम्मत के दौरान चार मंजिला इमारत ढह गई। हादसे में 6 लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका के बीच राहत अभियान जारी है।
News Saga Desk
महाराष्ट्र के मुंबई से सटे भिवंडी में गुरुवार रात Bhiwandi Building Collapse की दर्दनाक घटना सामने आई। एक चार मंजिला रिहायशी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है और मौके पर एनडीआरएफ, दमकल विभाग, पुलिस तथा नगर निगम की टीमें लगातार काम कर रही हैं।
हादसा कैसे हुआ?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह चार मंजिला इमारत काफी पुरानी थी और पिछले कुछ दिनों से इसकी मरम्मत का कार्य चल रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मरम्मत के दौरान इमारत के तीन महत्वपूर्ण पिलरों को तोड़ दिया गया था। इससे पूरी इमारत की संरचनात्मक मजबूती कमजोर हो गई और गुरुवार रात अचानक पूरी इमारत धराशायी हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रात करीब नौ बजे इमारत से तेज आवाजें आने लगी थीं। इसके साथ ही दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें भी दिखाई देने लगी थीं। खतरे को भांपते हुए कई परिवार समय रहते बाहर निकल आए, लेकिन मरम्मत कार्य में लगे कुछ मजदूर अंदर ही मौजूद थे, जो मलबे में दब गए।
राहत और बचाव अभियान जारी
Bhiwandi Building Collapse की सूचना मिलते ही भिवंडी पुलिस, दमकल विभाग, नगर निगम और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंच गईं। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी है।
राहतकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे को हटाकर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी संभावित लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक बचाव अभियान जारी रहेगा। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
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हादसे के पीछे लापरवाही की आशंका
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि इमारत की मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि बिना उचित तकनीकी सलाह और संरचनात्मक जांच के पिलरों को हटाया गया, जिससे पूरी इमारत का संतुलन बिगड़ गया।
हालांकि, प्रशासन ने अभी तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खतरे का अंदेशा होते ही कई निवासी तुरंत बाहर निकल आए और प्रशासन को सूचना दी। हालांकि, बताया जा रहा है कि जब इमारत गिरी, उस समय मरम्मत कार्य में लगे कुछ मजदूर अंदर ही मौजूद थे और वे मलबे में दब गए। फिलहाल प्रशासन राहत कार्य में जुटा है और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है।
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