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जमशेदपुर स्थित CSIR-NML ने Earth Indian Resources Ltd के साथ मैग्नेट रीसाइक्लिंग तकनीक हस्तांतरण के लिए MoU किया। इससे दुर्लभ मृदा तत्वों की पुनर्प्राप्ति और राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन को मिलेगा बढ़ावा।

जमशेदपुर स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) ने शुक्रवार को रायपुर की Earth Indian Resources Limited के साथ मैग्नेट पुनर्चक्रण (Magnet Recycling) तकनीक के हस्तांतरण के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया। यह पहल देश में दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) की पुनर्प्राप्ति और आत्मनिर्भर आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। साथ ही यह राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन को भी मजबूती प्रदान करेगी।
अनुपयोगी मैग्नेट से निकाले जाएंगे दुर्लभ मृदा तत्व
सीएसआईआर-एनएमएल द्वारा विकसित इस तकनीक के माध्यम से उपयोग के बाद अनुपयोगी हो चुके NdFeB (Neodymium-Iron-Boron) मैग्नेट स्क्रैप से उच्च शुद्धता वाले दुर्लभ मृदा ऑक्साइड प्राप्त किए जा सकेंगे। इन मैग्नेटों का व्यापक उपयोग पवन ऊर्जा संयंत्रों, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और औद्योगिक मशीनों में किया जाता है।
नई तकनीक की मदद से नियोडिमियम (Neodymium), प्रसीओडिमियम (Praseodymium) और डिस्प्रोसियम (Dysprosium) जैसे बहुमूल्य दुर्लभ मृदा तत्वों को पुनः प्राप्त कर दोबारा औद्योगिक उपयोग में लाया जा सकेगा।
पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा-कुशल तकनीक
सीएसआईआर-एनएमएल की इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पर्यावरण अनुकूल प्रक्रिया है। इसमें कम ऊर्जा की आवश्यकता वाली ऊष्मीय उपचार (Thermal Treatment) प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसके बाद जल लीचिंग (Water Leaching) तकनीक का उपयोग किया जाता है।
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इस प्रक्रिया में प्रबल खनिज अम्लों के उपयोग की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। साथ ही पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ बनती है।
आयरन ऑक्साइड भी मिलेगा सह-उत्पाद
इस तकनीक की एक और खासियत यह है कि पुनर्चक्रण प्रक्रिया के दौरान आयरन ऑक्साइड भी एक उपयोगी सह-उत्पाद (By-product) के रूप में प्राप्त होता है। इससे तकनीक की आर्थिक उपयोगिता बढ़ती है और संसाधनों का अधिकतम उपयोग संभव हो पाता है।
भारत सरकार द्वारा क्रिटिकल मिनरल्स की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यह तकनीक दुर्लभ मृदा तत्वों के आयात पर निर्भरता कम करने और देश में सतत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग को देखते हुए इस तरह की रीसाइक्लिंग तकनीक देश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
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