Bardhaman Terror Arrest: बर्धमान से जैश-ए-मोहम्मद का संदिग्ध गिरफ्तार, मुख्यमंत्री के रूट की रेकी के आरोप

Bardhaman Terror Arrest मामले में पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध को गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री के रूट की रेकी और आतंकी नेटवर्क से संपर्क के आरोपों की जांच जारी है।

News Saga Desk

पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने Bardhaman Terror Arrest मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व बर्धमान जिले के एक रिहायशी इलाके से आतंकी गतिविधियों के संदेह में एक युवक को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ का दावा है कि गिरफ्तार युवक का संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से है। उसकी पहचान हमीद मंडल के रूप में की गई है। हालांकि, जांच एजेंसियां यह भी सत्यापित कर रही हैं कि यह उसकी वास्तविक पहचान है या उसने फर्जी नाम का इस्तेमाल किया था।

गिरफ्तार आरोपी को शुक्रवार को बर्धमान अदालत में पेश किया जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उससे गहन पूछताछ की जा रही है ताकि उसके नेटवर्क और गतिविधियों का पूरा पता लगाया जा सके।

बर्धमान के पॉश इलाके से हुई गिरफ्तारी

एसटीएफ के अनुसार, Bardhaman Terror Arrest के तहत आरोपी को दुर्गापुर एक्सप्रेसवे के पास स्थित रेनेसां कॉम्प्लेक्स नामक आवासीय परिसर से गिरफ्तार किया गया। वह यहां किराये के एक फ्लैट में रह रहा था।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इससे पहले वह कोलकाता के न्यूटाउन इलाके में भी किराये के फ्लैट में रह चुका था। इसी आधार पर जांच एजेंसियां उसके निवास, गतिविधियों और संपर्कों की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।

मुख्यमंत्री के रूट की रेकी करने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी जिस इलाके में न्यूटाउन में रह रहा था, वह मुख्यमंत्री के आवासीय क्षेत्र के निकट बताया जा रहा है। एसटीएफ सूत्रों का दावा है कि आरोपी मुख्यमंत्री के आने-जाने वाले मार्गों पर नजर रखता था और कथित तौर पर उन रास्तों की रेकी भी की थी जिनका उपयोग उनके आवागमन के दौरान किया जाता है।

Bardhaman Terror Arrest
Close up of male hands in bracelets behind back

हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य सबूतों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर रही हैं।

तकनीकी जांच में मिले अहम सुराग

एसटीएफ के मुताबिक, Bardhaman Terror Arrest की जांच के दौरान आरोपी की टावर लोकेशन, डिजिटल गतिविधियों और संचार रिकॉर्ड की भी जांच की गई। प्रारंभिक जांच में एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि आरोपी कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैंडलरों के संपर्क में था।

जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि आरोपी की भूमिका केवल रेकी तक सीमित थी या वह किसी बड़े नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था। उसके मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

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नागरिकता और पहचान की भी जांच

जांच के दौरान कुछ सूत्रों ने आशंका जताई है कि गिरफ्तार युवक पाकिस्तान का नागरिक हो सकता है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि आरोपी की वास्तविक पहचान, नागरिकता, यात्रा इतिहास और उसके सभी संपर्कों की जांच की जा रही है। आधिकारिक पुष्टि होने तक किसी भी दावे को अंतिम नहीं माना जा सकता।

जांच एजेंसियां अब न्यूटाउन और बर्धमान में आरोपी को किराये पर फ्लैट उपलब्ध कराने वाले मकान मालिकों और संबंधित लोगों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही हैं।

अधिकारियों का उद्देश्य यह जानना है कि आरोपी कब से इन स्थानों पर रह रहा था, उसने किरायेदारी के समय कौन-कौन से दस्तावेज दिए थे और क्या उसकी गतिविधियों को लेकर किसी को कोई संदेह हुआ था।

देश की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। संवेदनशील प्रतिष्ठानों, महत्वपूर्ण व्यक्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की कथित रेकी जैसे मामलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद गंभीर माना जाता है। ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर आगे की जांच की जाती है।

पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने बताया है कि आरोपी को आतंकी गतिविधियों के संदेह में गिरफ्तार किया गया है और उससे पूछताछ जारी है। एजेंसी का कहना है कि उसकी पहचान, कथित नेटवर्क और संपर्कों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस ने अभी तक उसकी नागरिकता या अन्य दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अदालत में पेशी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई संदिग्ध गतिविधि, संदिग्ध व्यक्ति या असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित सुरक्षा एजेंसी को दें। जांच पूरी होने तक किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर विश्वास करने से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।

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