भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर भाजपा सांसदों ने संसद परिसर में मौन उपवास रखा। झारखंड की कथित भर्ती अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
News saga Desk
भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर शुक्रवार को संसद परिसर में झारखंड से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने गांधी प्रतिमा के समक्ष मौन उपवास और धरना प्रदर्शन किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में सांसदों ने झारखंड की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर भाजपा ने कहा कि वह राज्य के छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है तथा उनकी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी।
संसद परिसर में भाजपा सांसदों का विरोध प्रदर्शन
संसद परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष आयोजित इस मौन उपवास में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के अलावा सांसद बीडी राम, विद्युत वरण महतो, डॉ. प्रदीप वर्मा, ढुल्लू महतो, मनीष जायसवाल और कालीचरण सिंह शामिल हुए।
प्रदर्शन के माध्यम से भाजपा सांसदों ने राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। पार्टी का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि युवाओं का विश्वास कायम रहे।
भाजपा ने लगाए कथित अनियमितताओं के आरोप
प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल और उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा सहित कई भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले छह वर्षों के दौरान राज्य में कई भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अन्य कथित गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में भी गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और इस संबंध में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
इन आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष का जवाब इस समाचार में उपलब्ध नहीं है।
छात्रों के समर्थन में आंदोलन का ऐलान
भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर भाजपा ने राज्यव्यापी आंदोलन की भी घोषणा की है। आदित्य साहू ने बताया कि छात्रों के आंदोलन के समर्थन में 1 अगस्त को झारखंड के सभी 24 जिलों में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
इसके अलावा 31 जुलाई की शाम राज्य के सभी जिलों में मशाल जुलूस निकालने का भी निर्णय लिया गया है। उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य आंदोलनरत छात्रों को यह संदेश देना है कि उनकी मांगों को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन प्राप्त है।
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कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप
आदित्य साहू ने कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के अधिकारों और रोजगार की बात करती है, लेकिन झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित मामलों पर मौन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह रुख विरोधाभासी है और राज्य सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
झारखंड में पिछले कुछ समय से विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों द्वारा प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई की मांग उठाते रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा ने संसद परिसर में विरोध दर्ज कराया और इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने से राज्य में इस मुद्दे पर चर्चा और बढ़ सकती है। यदि विपक्ष और छात्र संगठन लगातार आंदोलन जारी रखते हैं, तो भर्ती प्रक्रियाओं और उनकी जांच को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है। वहीं, अभ्यर्थियों की अपेक्षा रहेगी कि संबंधित मामलों में जांच और निर्णय नियमानुसार किए जाएं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि पार्टी झारखंड के छात्रों और युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और आंदोलनरत छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की मांग की।
भर्ती परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आयोगों और संबंधित सरकारी विभागों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी जांच, भर्ती प्रक्रिया या परीक्षा से जुड़े निर्णय की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त करें और अफवाहों से बचें।
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