रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की पहल तेज

NEWS SAGA DESK

रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के अभियान में स्माइल टीम ने दो महिला भिक्षुओं को रेस्क्यू किया। काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है।

रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की मुहिम

रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की दिशा में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग, भारत सरकार तथा महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड सरकार के सहयोग से अभियान चलाया जा रहा है। स्वावलंबन संस्था की स्माइल टीम ने रांची रेलवे स्टेशन को प्राथमिकता के आधार पर चुना है। टीम की ओर से पिछले जून महीने से रेलवे प्रशासन और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के सहयोग से लगातार रेस्क्यू, काउंसलिंग और पुनर्वास की दिशा में काम किया जा रहा है।

रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति

अभियान का उद्देश्य केवल रेलवे स्टेशन परिसर से भिक्षावृत्ति को हटाना नहीं, बल्कि भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों को सुरक्षित आश्रय, परामर्श और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना है। इसके तहत रेस्क्यू किए गए लोगों को आश्रय गृह पहुंचाया जाता है और उनकी परिस्थितियों को समझते हुए आगे की सहायता की कोशिश की जाती है।

स्माइल योजना के तहत लगातार चल रहा रेस्क्यू अभियान

स्माइल योजना के तहत स्वावलंबन संस्था की टीम रांची रेलवे स्टेशन पर लगातार अभियान चला रही है। स्टेशन मास्टर सतीश चौधरी और रेलवे सुरक्षा बल के पोस्ट कमांडेंट शिशुपाल कुमार के नेतृत्व में टीम द्वारा स्टेशन परिसर में भिक्षावृत्ति से जुड़े मामलों की पहचान कर रेस्क्यू की कार्रवाई की जा रही है।

रेस्क्यू के बाद आश्रय गृह पहुंचने वाले लोगों की काउंसलिंग की जाती है। टीम उनके सामाजिक और पारिवारिक हालात को समझने के साथ पुनर्वास के संभावित विकल्पों पर भी काम कर रही है। संस्था का प्रयास है कि जरूरतमंद लोगों को केवल तत्काल आश्रय ही नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए बेहतर जीवन की दिशा में सहायता मिल सके।

31 जुलाई को दो महिला भिक्षुओं का रेस्क्यू

इसी अभियान के तहत 31 जुलाई 2026 को रांची रेलवे स्टेशन का दोबारा फॉलो-अप और रेस्क्यू अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान रेलवे सुरक्षा बल के सहयोग से दो महिला भिक्षुओं को रेस्क्यू कर आश्रय गृह लाया गया।

रेस्क्यू किए गए लोगों में रीना रावत, उम्र 23 वर्ष और अणु उरांव, उम्र 16 वर्ष शामिल हैं। दोनों को सुरक्षित रूप से आश्रय गृह पहुंचाने के बाद आगे की आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई।

अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, रेस्क्यू के बाद काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। टीम का प्रयास है कि जरूरतमंद लोगों की स्थिति के अनुसार उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

रेस्क्यू के साथ पुनर्वास पर भी जोर

रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की मुहिम में रेस्क्यू के साथ-साथ पुनर्वास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संस्था का मानना है कि केवल किसी व्यक्ति को स्टेशन से हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए उसकी परिस्थितियों को समझना और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना जरूरी है।

इसी सोच के तहत आश्रय गृह में लाए गए लोगों की काउंसलिंग की जाती है। उनकी जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की दिशा में प्रयास किए जाते हैं। साथ ही लगातार फॉलो-अप के जरिए यह देखने की कोशिश की जा रही है कि रेस्क्यू किए गए लोगों को आगे किसी तरह की सहायता की आवश्यकता तो नहीं है।

स्वावलंबन संस्था की स्माइल टीम का कहना है कि रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए लगातार रेस्क्यू और फॉलो-अप अभियान चलाया जाएगा। संस्था के अनुसार, निरंतर प्रयास, पुनर्वास और जन-जागरूकता के माध्यम से सकारात्मक बदलाव संभव है।

अभियान में रेलवे प्रशासन और RPF की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की मुहिम को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इसी उद्देश्य से टीम नियमित रूप से स्टेशन का निरीक्षण और फॉलो-अप कर रही है।

जन-जागरूकता भी अभियान का अहम हिस्सा

रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के प्रयास में जन-जागरूकता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम लोगों से अपील की जा सकती है कि वे भिक्षावृत्ति को बढ़ावा देने के बजाय जरूरतमंद लोगों को उचित सहायता और सरकारी पुनर्वास व्यवस्था तक पहुंचाने में सहयोग करें।

रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों की भूमिका भी इस अभियान में अहम हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को सहायता की जरूरत दिखाई देती है तो संबंधित प्रशासनिक या सुरक्षा कर्मियों को इसकी जानकारी देना ज्यादा प्रभावी कदम हो सकता है।

इन लोगों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

अभियान में रांची रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर सतीश चौधरी, रांची रेलवे सुरक्षा बल के पोस्ट कमांडेंट शिशुपाल कुमार, स्वावलंबन संस्था की सचिव पुनीता राय, एएसआई संगीता तिर्की, रीना यादव, स्माइल प्रबंधक शारदा प्रसाद, परामर्शदात्री सुषमा सिन्हा, केयरटेकर उषा कुमारी, ब्रीज कोर्स समन्वयक रेखा कुमारी, किशोर कुमार दास, देवनारायण लोहारा और विजय उरांव शामिल रहे।

इन सभी के संयुक्त प्रयास से रेस्क्यू अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। संस्था की ओर से कहा गया है कि रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल होने तक अभियान जारी रहेगा।

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रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की पहल का असर केवल स्टेशन परिसर तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। यदि रेस्क्यू के साथ पुनर्वास और जन-जागरूकता के प्रयास लगातार जारी रहते हैं, तो जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित वातावरण और बेहतर जीवन की दिशा में सहायता मिल सकती है।

31 जुलाई को दो महिला भिक्षुओं का रेस्क्यू इसी अभियान की निरंतरता का हिस्सा है। आने वाले दिनों में भी स्टेशन पर फॉलो-अप अभियान जारी रहने की बात कही गई है। संस्था और संबंधित विभागों का प्रयास है कि रेस्क्यू, काउंसलिंग, पुनर्वास और जागरूकता को साथ लेकर इस अभियान को प्रभावी बनाया जाए।

रांची रेलवे स्टेशन को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की यह पहल तभी स्थायी सफलता हासिल कर सकती है, जब प्रशासनिक एजेंसियों, सामाजिक संस्थाओं और आम जनता का सहयोग लगातार मिलता रहे। फिलहाल स्वावलंबन संस्था की स्माइल टीम इसी लक्ष्य के साथ लगातार काम कर रही है।

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