पटना नगर निगम सफाई कर्मियों की हड़ताल खत्म। सरकार से समझौते के बाद वेतन सीधे बैंक खाते में, बोनस, पेंशन और स्थायीकरण की दिशा में बड़ा फैसला।
पटना नगर निगम सफाई कर्मियों की हड़ताल सात दिनों बाद समाप्त हो गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग और सफाईकर्मियों के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता सफल रहने के बाद दोनों पक्षों ने समझौते पर सहमति जताई। समझौते के बाद नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा और सफाईकर्मी संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। बैठक में पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा भी मौजूद रहे। हड़ताल खत्म होने के साथ ही राजधानी में सफाई व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।

सात दिन बाद खत्म हुई हड़ताल
पटना नगर निगम सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण पिछले एक सप्ताह से शहर के कई इलाकों में कूड़े का ढेर लग गया था। सड़कों, मोहल्लों और बाजारों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से आम लोगों को बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा था। लगातार बढ़ती समस्याओं के बीच नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से चर्चा की।
बैठक के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी और कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया। इसके साथ ही शहर में सफाई कार्य दोबारा शुरू करने की घोषणा की गई।
समझौते में कर्मचारियों को क्या मिला?
समझौते के तहत नगर निकायों में कार्यरत सफाई कर्मियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं देने पर सहमति बनी है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार दैनिक कर्मियों को अब अवकाश, ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई होगी। इसके अलावा उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तरह अन्य सेवा लाभ देने का भी प्रस्ताव आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में यह भी तय हुआ कि आउटसोर्सिंग और ठेका एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों का वेतन अब सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा। इससे भुगतान में पारदर्शिता आएगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी। साथ ही सफाई कर्मियों को पहली बार बोनस देने पर भी सहमति बनी है।
3816 कर्मचारियों के स्थायीकरण का प्रस्ताव
पटना नगर निगम सफाई कर्मियों की हड़ताल के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा दैनिक कर्मियों के स्थायीकरण का था। नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति ने 3816 दैनिक कर्मचारियों के स्थायीकरण से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी देकर विभाग को भेजने की अनुशंसा की है।
प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी का मासिक वेतन लगभग 35,800 रुपये निर्धारित किया गया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो नगर निगम पर हर महीने करीब 13.66 करोड़ रुपये का वेतन व्यय होगा। वर्तमान में इन कर्मचारियों पर लगभग 6.04 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च किए जाते हैं। स्थायीकरण लागू होने पर निगम पर अतिरिक्त 7.61 करोड़ रुपये प्रति माह तथा लगभग 163.94 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय भार पड़ेगा।
विभिन्न अंचलों में कार्यरत कर्मचारी
पटना नगर निगम के आठ कार्यालयों और अंचलों में कुल 3816 दैनिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें सबसे अधिक 941 कर्मचारी नूतन राजधानी अंचल में तैनात हैं। इसके अलावा पाटलिपुत्र अंचल में 700, अजीमाबाद में 585, बांकीपुर में 513, कंकड़बाग में 426, पटना सिटी में 405, जलापूर्ति अंचल में 199 और मुख्यालय में 47 कर्मचारी कार्यरत हैं।
इन कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी, जिस पर अब सकारात्मक पहल होती दिखाई दे रही है।
नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति बन गई है, जबकि शेष मांगों पर विचार के लिए एक समिति गठित की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि एसीपी और एमएससीपी योजना के लाभ पर लगी रोक हटाने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक पत्राचार किया जाएगा। रोक हटते ही पात्र कर्मचारियों को इसका लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना प्राथमिकता है और कर्मचारियों के काम पर लौटने से नागरिकों को जल्द राहत मिलेगी।
इसे भी देखें…Durga Puja 2026: रांची में चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति का भूमि पूजन और खूंटी पूजन
पटना नगर निगम सफाई कर्मियों की हड़ताल समाप्त होने से राजधानी की सफाई व्यवस्था जल्द पटरी पर लौटने की उम्मीद है। पिछले सात दिनों में शहर के कई इलाकों में कचरा जमा होने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का सामना करना पड़ रहा था। अब नियमित सफाई शुरू होने से हालात में सुधार आने की संभावना है।
इसके साथ ही कर्मचारियों की सेवा शर्तों में सुधार और वेतन भुगतान की नई व्यवस्था भविष्य में श्रमिकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ नगर निगम की कार्यप्रणाली को भी अधिक पारदर्शी बनाने में मदद करेगी।
No Comment! Be the first one.