National Handloom Day: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नेताओं ने बुनकरों को दी शुभकामनाएं, ‘Vocal for Local’ पर दिया जोर

National Handloom Day पर उपराष्ट्रपति, ओम बिरला, अमित शाह, राजनाथ सिंह और अन्य नेताओं ने बुनकरों को शुभकामनाएं दीं। ‘Vocal for Local’ और आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर।

News Saga Desk

देशभर में National Handloom Day के अवसर पर शुक्रवार को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बुनकरों और कारीगरों को शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को देश की सांस्कृतिक पहचान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए नागरिकों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने की अपील की।

National Handloom Day के मौके पर नेताओं ने कहा कि हथकरघा उद्योग केवल वस्त्र निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों की आजीविका, पारंपरिक कौशल और भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।

भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है हथकरघा

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा कलाकारी, मजबूती और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी का अनमोल उदाहरण है। उन्होंने बुनकरों और कारीगरों के समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनके प्रयास न केवल इस विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि टिकाऊ रोजगार का सृजन कर ग्रामीण समुदायों को भी सशक्त बनाते हैं।

उन्होंने लोगों से हाथ से बने उत्पादों को अपनाने, स्थानीय कारीगरों का समर्थन करने और National Handloom Day के अवसर पर ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया।

लोकसभा अध्यक्ष ने कोटा डोरिया का किया उल्लेख

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देशभर के बुनकरों के श्रम, कौशल और सदियों पुरानी परंपरा को नमन किया। उन्होंने कहा कि कोटा डोरिया जैसे प्रसिद्ध हथकरघा उत्पाद भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता के सशक्त प्रतीक हैं।

National Handloom Day

उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक हथकरघा उत्पादों को अपनाने और स्थानीय बुनकरों का सहयोग करने की अपील की, ताकि भारत की पारंपरिक कला और शिल्प को नई पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।

केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है और यह देश की सांस्कृतिक विविधता तथा विरासत का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में National Handloom Day की शुरुआत हथकरघा बुनाई की कला को संरक्षित करने और उसे नई पहचान देने के उद्देश्य से की गई। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक व्यापार समझौतों और विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से बुनकरों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र को और मजबूती मिल रही है।

इसे भी देखे- CM Hemant Soren Gifts Jharkhand 58 New Modern Fire Trucks | 

अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी दी शुभकामनाएं

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देश के सभी बुनकरों का सम्मान करते हुए लोगों से भारतीय बुनाई परंपरा को संजोकर रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हथकरघा उत्पादों को अपनाकर प्रत्येक नागरिक ‘वोकल फॉर लोकल’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर सकता है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हर हथकरघा उत्पाद में भारत की आत्मा, परंपरा और पीढ़ियों की मेहनत समाहित होती है। उन्होंने बुनकरों की कला को देश की सांस्कृतिक पहचान और लाखों लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बताया।

वहीं केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हथकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उत्कृष्ट शिल्पकला और लाखों बुनकर परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार है। उनके अनुसार प्रत्येक हथकरघा उत्पाद देश के बुनकरों के कौशल, समर्पण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक है।

National Handloom Day का उद्देश्य भारत की पारंपरिक हथकरघा कला को प्रोत्साहित करना, बुनकरों के योगदान को सम्मान देना और स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। यह दिन देश की समृद्ध वस्त्र परंपरा और हस्तनिर्मित उत्पादों की पहचान को मजबूत करने का अवसर भी माना जाता है।

हथकरघा उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्रोत है। लाखों बुनकर परिवार इस क्षेत्र से जुड़े हैं और पारंपरिक तकनीकों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।

नेताओं ने अपने संदेशों में नागरिकों से अपील की कि वे अधिक से अधिक भारतीय हथकरघा उत्पादों का उपयोग करें और स्थानीय कारीगरों का समर्थन करें। उनका मानना है कि इससे न केवल पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी गति मिलेगी।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर दिए गए इन संदेशों का साझा उद्देश्य बुनकरों के योगदान का सम्मान करना, भारतीय हस्तशिल्प को नई पहचान देना और स्थानीय उत्पादों के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाना रहा।

Read More News

जमशेदपुर में 13वें हस्तकरघा दिवस का शुभारंभ, राज्यपाल संतोष गंगवार ने बुनकरों का बढ़ाया उत्साह

जमशेदपुर में 13वें हस्तकरघा दिवस का उद्घाटन राज्यपाल संतोष गंगवार ने किया। उन्होंने हस्तकरघा को...

Read More