रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन पर पीएम मोदी ने युवाओं से जीवन के संघर्षों से सीखने और आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की। शॉर्टकट से बचने की सलाह दी।
News Saga Desk
नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को जीवन में संघर्ष, मेहनत और धैर्य का महत्व समझाया। कोविंद की आत्मकथा पर बोले पीएम मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरे लोगों के जीवन के अनुभवों से सीख लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि रील और सोशल मीडिया के दौर में शॉर्टकट की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जबकि वास्तविक सफलता के लिए निरंतर मेहनत जरूरी है।
पीएम मोदी ने शॉर्टकट की प्रवृत्ति पर चेताया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के दौर में युवाओं के बीच हर चीज जल्दी हासिल करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने रेलवे स्टेशन पर लिखे संदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि शॉर्टकट व्यक्ति को छोटा कर देता है।
कोविंद की आत्मकथा पर बोले पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं को मुश्किल परिस्थितियों से भागने के बजाय उनसे सीखना चाहिए। उनके अनुसार, आत्मकथाएं किसी व्यक्ति की सफलता के पीछे छिपे संघर्ष और मेहनत को समझने का अवसर देती हैं।
संघर्ष से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की कहानी
प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सामान्य परिवार से निकलकर अपनी मेहनत और क्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया।
कानपुर देहात में जन्मे कोविंद के बचपन में परिवार को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। मोदी ने बताया कि उनके घर में एक बार आग लगने की घटना में उनकी मां की मृत्यु हो गई थी। इतनी कम उम्र में मां को खोना बेहद दर्दनाक था, लेकिन कोविंद ने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक पड़ोस की महिला ने उनके पालन-पोषण में मदद की, जबकि उनके पिता ने परिवार को संभाला और बच्चों को संस्कार दिए। कोविंद अपने पिता को अपना हीरो मानते हैं।
शिक्षा को बनाया अपनी ताकत
मोदी ने कहा कि बचपन में संसाधनों की कमी के बावजूद रामनाथ कोविंद ने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और लगातार मेहनत करते हुए आगे बढ़े।

राष्ट्रपति पद तक पहुंचने के बाद भी उनकी सादगी और विनम्रता कायम रही। प्रधानमंत्री ने उनके साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उन्हें कोविंद को करीब से जानने और राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन पाने का अवसर मिला। उन्होंने कोविंद के स्नेह और आत्मीयता को अपनी बड़ी पूंजी बताया।
राष्ट्रपति भवन में सादगी का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में कार्यकाल के दौरान रामनाथ कोविंद प्रोटोकॉल से अलग आत्मीय व्यवहार के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने बताया कि कोविंद कई बार प्रधानमंत्री को विदा करने के लिए गाड़ी तक आते थे।
मोदी ने कोविंद के गांव परौंख जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद गांव पहुंचने पर कोविंद ने अपने गुरुओं के पैर छुए और गांव की मिट्टी को नमन किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, उनके इस आचरण ने भारतीय संस्कारों की तस्वीर सामने रखी।
लोकतंत्र और समान अवसर का संदेश
कोविंद की आत्मकथा पर बोले पीएम मोदी ने कहा कि उनका जीवन उस भारत के सपने का उदाहरण है, जहां गरीब और वंचित व्यक्ति भी मेहनत और योग्यता के बल पर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है।
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों ने ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां समाज के अंतिम व्यक्ति को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले।
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राजनीति और सार्वजनिक जीवन के अनुभव
प्रधानमंत्री ने बताया कि रामनाथ कोविंद ने अपनी आत्मकथा में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के साथ काम करने के अनुभवों और उनसे मिली सीख को भी साझा किया है। उन्होंने राजनीति और समाजसेवा को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और सांसद, बिहार के राज्यपाल तथा राष्ट्रपति के रूप में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।
मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कोविंद सक्रिय हैं और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर काम कर रहे हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से देश के लोगों, विशेषकर युवाओं को सीख लेनी चाहिए।
कोविंद की आत्मकथा पर बोले पीएम मोदी ने कहा कि आत्मकथाओं के माध्यम से किसी व्यक्ति के जीवन के साथ उस दौर के इतिहास को भी करीब से समझा जा सकता है। किताबों में दर्ज घटनाओं को उस व्यक्ति के अनुभवों के जरिए समझने का अवसर मिलता है, जिसने उन्हें खुद जिया है।
उन्होंने युवाओं से अपनी पसंद की आत्मकथाएं पढ़ने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद कर सकती है कि संघर्ष, ईमानदारी, मेहनत और जीवन-मूल्य किस तरह किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकार देते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो परेशानियों से परास्त न हों और चुनौतियों के सामने मायूस होने के बजाय मेहनत से आगे बढ़ें। उनके अनुसार, रामनाथ कोविंद की आत्मकथा युवाओं में इसी तरह का आत्मविश्वास और संकल्प पैदा कर सकती है।
इस तरह कोविंद की आत्मकथा पर बोले पीएम मोदी का संदेश केवल पुस्तक के विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे संघर्ष से सीखने, शॉर्टकट से बचने और निरंतर मेहनत करने की प्रेरणा से जोड़ा। यह आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र, सार्वजनिक जीवन और व्यक्तिगत संघर्षों को समझने के लिए आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखी जा रही है।
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