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अवध डेंटल कॉलेज को हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने EC रद्द करने और 2026-27 में दाखिले पर रोक की कार्रवाई को गलत माना, 68 छात्रों की वैधता पर जांच जारी रहेगी।
रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर के अवध डेंटल कॉलेज को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने 68 छात्रों के बीडीएस में कथित गलत प्रवेश के मामले में राज्य सरकार की ओर से कॉलेज का एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट (Essentiality Certificate) रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने नेशनल डेंटल कमीशन (NDC) की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कॉलेज के सभी यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में नामांकन पर लगाई गई रोक को भी गलत माना है।

इस मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया और अधिवक्ता कुमार वैभव ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
क्या है पूरा मामला?
मामला अवध डेंटल कॉलेज में 68 छात्रों के बीडीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश से जुड़ा है। इन दाखिलों को लेकर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार ने कॉलेज को जारी एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया था।
इसके बाद नेशनल डेंटल कमीशन ने भी कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सभी यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में नामांकन पर रोक लगा दी थी। कॉलेज ने इन कार्रवाइयों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट को रद्द करने के आधार और उससे जुड़ी परिस्थितियों पर विस्तार से विचार किया।
सीमित परिस्थितियों में ही रद्द हो सकता है EC
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट को मनमाने तरीके से वापस नहीं लिया जा सकता। अदालत के अनुसार इसे केवल सीमित परिस्थितियों में ही रद्द किया जा सकता है।
इन परिस्थितियों में प्रमाणपत्र का धोखाधड़ी से प्राप्त किया जाना, प्रमाणपत्र जारी करने का आधार समाप्त हो जाना या इसी प्रकृति का कोई अन्य गंभीर कारण शामिल हो सकता है।
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अदालत ने मौजूदा मामले में ऐसा कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया, जिसके चलते 19 जनवरी 2018 को जारी एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट को रद्द किया जा सके। इसी आधार पर राज्य सरकार द्वारा EC रद्द करने के आदेश को अदालत ने टिकाऊ नहीं माना और उसे निरस्त कर दिया।
NDC की दाखिले पर रोक की कार्रवाई भी गलत
हाईकोर्ट ने नेशनल डेंटल कमीशन की ओर से की गई कार्रवाई पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अवध डेंटल कॉलेज के सभी यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले पर लगाई गई रोक को भी गलत माना।
इससे कॉलेज को आगामी शैक्षणिक सत्र में दाखिले की प्रक्रिया को लेकर बड़ी राहत मिली है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में 68 छात्रों के दाखिले की वैधता को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
अदालत के आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने 68 छात्रों के बीडीएस में दाखिले को वैध या अवैध घोषित नहीं किया है। इस मुद्दे को नेशनल डेंटल कमीशन की स्वतंत्र जांच के लिए छोड़ दिया गया है।
इसका मतलब है कि कॉलेज को EC रद्द किए जाने और सभी पाठ्यक्रमों में नामांकन पर रोक के मामले में राहत मिल गई है, लेकिन 68 छात्रों के दाखिले से जुड़ा मूल विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
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