पूर्णिया में 12:01 बजे फहरता है तिरंगा, 75 साल पुरानी परंपरा

NEWS SAGA DESK

पूर्णिया के झंडा चौक पर 15 अगस्त की रात 12:01 बजे तिरंगा फहराने की 75 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम है। जानें 1947 से जुड़ी पूरी कहानी।

पूरा देश 15 अगस्त की सुबह स्वतंत्रता दिवस मनाता है, लेकिन बिहार का पूर्णिया आजादी का जश्न एक अनोखे अंदाज में मनाता है। पूर्णिया में 12:01 बजे तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत करने की करीब 75 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम है। 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि ठीक 12:01 बजे शहर के ऐतिहासिक झंडा चौक पर तिरंगा फहराया जाता है और राष्ट्रगान के साथ देशभक्ति का माहौल बन जाता है।

पूर्णिया में 12:01 बजे तिरंगा

पूर्णिया की यह परंपरा सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि आजादी की उस रात से जुड़ी स्मृति है, जब देश के स्वतंत्र होने की खबर ने लोगों को आधी रात में ही सड़कों पर ला दिया था। हर साल बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने झंडा चौक पहुंचते हैं।

1947 की उस रात से शुरू हुई परंपरा

पूर्णिया में आधी रात को ध्वजारोहण की परंपरा 14 अगस्त 1947 की रात से शुरू होने की बात कही जाती है। उस समय देश के स्वतंत्र होने की घोषणा को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह था। बताया जाता है कि रात करीब 12 बजे रेडियो पर भारत की आजादी की घोषणा की खबर सुनाई दी। आजादी के आंदोलन में सक्रिय रहे पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी और स्थानीय लोग खुशी से झूम उठे। उत्साह इतना अधिक था कि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की सुबह होने का इंतजार नहीं किया।

रात में ही बाजार की एक दुकान से तिरंगा खरीदा गया और ठीक 12:01 बजे उसे फहराकर आजादी का जश्न मनाया गया। यही क्षण आगे चलकर पूर्णिया की एक अनोखी परंपरा का आधार बन गया।

कैसे पड़ा जगह का नाम झंडा चौक?

जिस स्थान पर उस रात पहली बार तिरंगा फहराया गया था, वह भट्ठा बाजार इलाके में स्थित है। ऐतिहासिक ध्वजारोहण के बाद लोगों ने इस जगह को झंडा चौक के नाम से पुकारना शुरू कर दिया। समय के साथ यह नाम लोगों की जुबान पर ऐसा चढ़ा कि यह स्थान पूर्णिया की पहचान का हिस्सा बन गया। आज भी 15 अगस्त की मध्यरात्रि यहां होने वाला ध्वजारोहण इस ऐतिहासिक घटना की याद को जीवित रखता है।

पूर्णिया में 12:01 बजे तिरंगा

पूर्णिया में 12:01 बजे तिरंगा फहराने की परंपरा की खासियत यही है कि यह स्वतंत्रता दिवस के सामान्य कार्यक्रमों से अलग समय पर आयोजित होती है। जब देश के अधिकांश हिस्सों में लोग 15 अगस्त की सुबह होने का इंतजार करते हैं, तब पूर्णिया में आजादी का उत्सव रात 12:01 बजे ही शुरू हो जाता है।

स्वतंत्रता सेनानियों की याद से जुड़ा आयोजन

पूर्णिया के झंडा चौक का यह आयोजन उन स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति से भी जुड़ा हुआ है, जिन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में भाग लिया था। स्थानीय इतिहास के अनुसार यहां के स्वतंत्रता सेनानी असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और जेल भरो जैसे आंदोलनों से जुड़े रहे थे।

आज की पीढ़ी के लिए यह आयोजन उस संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर बनता है। आधी रात को तिरंगा फहराने के दौरान जब राष्ट्रगान की धुन गूंजती है, तो माहौल पूरी तरह देशभक्ति से भर जाता है।

इस बार भी आधी रात को होगा ध्वजारोहण

ऐतिहासिक झंडा चौक पर इस वर्ष भी मध्यरात्रि के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शुक्रवार की रात 14 अगस्त से 15 अगस्त की शुरुआत होते ही यहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है।

आयोजन को लेकर झंडा चौक की साफ-सफाई और सजावट की गई है। विशेष लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है, ताकि ऐतिहासिक स्थल पर होने वाला कार्यक्रम यादगार बन सके।

स्थानीय लोग हर साल की तरह इस बार भी 12:01 बजे तिरंगा फहराए जाने के क्षण का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही तिरंगा फहराया जाएगा, राष्ट्रगान के साथ पूरा इलाका देशभक्ति के नारों से गूंज उठेगा।

पूर्णिया की पहचान बन चुकी है परंपरा

पूर्णिया में 12:01 बजे तिरंगा फहराने की परंपरा अब शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन आजादी की पहली रात से जुड़ी यह स्मृति अब भी लोगों को उसी उत्साह के साथ जोड़ती है।

यह आयोजन यह भी बताता है कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन लोगों के संघर्ष, सपनों और भावनाओं की याद है जिन्होंने देश को आजाद होते देखा था। आधी रात को होने वाला यह ध्वजारोहण पूर्णिया के लोगों के लिए गर्व का विषय है।
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क्यों खास है झंडा चौक का जश्न?

भारत में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुबह ध्वजारोहण की परंपरा आम है। लेकिन पूर्णिया में आधी रात के तुरंत बाद तिरंगा फहराने की परंपरा इसे विशिष्ट बनाती है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन 1947 की उस ऐतिहासिक रात को दोहराने जैसा है, जब आजादी की खबर मिलते ही लोगों ने उत्साह में रात को ही तिरंगा फहरा दिया था।

आज भी जब घड़ी 12 बजकर 1 मिनट का समय बताती है, झंडा चौक पर मौजूद लोगों की निगाहें तिरंगे पर टिक जाती हैं। राष्ट्रगान के साथ फहराता राष्ट्रीय ध्वज उस ऐतिहासिक परंपरा और देशभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाता है।

इस तरह पूर्णिया में 12:01 बजे तिरंगा फहराने की परंपरा सिर्फ एक अनोखा स्वतंत्रता दिवस समारोह नहीं, बल्कि आजादी की पहली रात की याद को संजोए रखने वाला जीवंत इतिहास है। हर साल हजारों भावनाओं के बीच झंडा चौक पर फहराता तिरंगा पूर्णिया की देशभक्ति और इतिहास से जुड़े गौरव की कहानी कहता है।

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