वाराणसी में गंगा उफान पर, नमोघाट तक पहुंची लहरें

वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा और लहरें नमोघाट तक पहुंचीं। नाव संचालन पर रोक, छत पर गंगा आरती और मणिकर्णिका घाट पर बदली व्यवस्था।

News Saga Desk

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का असर घाटों और आसपास के इलाकों में दिखाई देने लगा है। गंगा की लहरें घाटों की सीढ़ियां पार कर नमोघाट पर बने विशाल ‘नमस्ते’ स्कल्पचर तक पहुंच गई हैं। बढ़ते जलस्तर और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए दशाश्वमेध और शीतला घाट पर गंगा आरती अब छत पर कराई जा रही है। वहीं, गंगा में नावों के संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है।

24 घंटे में 44 सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार सुबह आठ बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 66.72 मीटर दर्ज किया गया। सोमवार को यह 66.28 मीटर था। यानी 24 घंटे के भीतर जलस्तर में 44 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। अधिकारियों के अनुसार गंगा का जलस्तर अभी बढ़ने का रुख बनाए हुए है।

वाराणसी में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। गाजीपुर में जलस्तर 59.33 मीटर, बलिया में 55.98 मीटर, फाफामऊ में 79.55 मीटर, मीरजापुर में 72.30 मीटर और प्रयागराज में 78.74 मीटर दर्ज किया गया। इन स्थानों पर भी नदी में बढ़ाव की स्थिति बनी हुई है।

घाटों पर बदली गंगा आरती की व्यवस्था

गंगा के बढ़ते पानी के कारण दशाश्वमेध घाट पर होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती को छत पर स्थानांतरित किया गया है। शीतला घाट पर भी दैनिक आरती अब छत से कराई जा रही है। आरती कराने वाली संस्था के अनुसार यह फैसला श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

छत पर सीमित जगह होने के कारण आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी सीमित की जा रही है। ऐसे में वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं को प्रशासन और आयोजकों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।

नाव संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक

दशाश्वमेध के एसीपी डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि गंगा में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार मंगलवार को जलस्तर करीब 66.90 मीटर बताया गया और लगभग चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाव हो रहा था।

वाराणसी

सावन माह में घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा कारणों से गंगा में नावों के संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। जलस्तर सामान्य होने के बाद ही नाव संचालन को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। लाउड हेलर के माध्यम से लोगों को सतर्क किया जा रहा है और नाविकों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

मणिकर्णिका घाट पर छत पर हो रहा शवदाह

बढ़ते पानी का असर अंतिम संस्कार की व्यवस्था पर भी पड़ा है। गंगा का पानी मणिकर्णिका घाट की गलियों तक पहुंच गया है। इसके कारण शवदाह अब घाट की ऊपरी छत पर किया जा रहा है। हरिश्चंद्र घाट की स्थिति भी प्रभावित हुई है और यहां घाट की गलियों में अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

जलस्तर बढ़ने के कारण अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को इंतजार भी करना पड़ रहा है। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि लगातार बढ़ते पानी के बीच धार्मिक गतिविधियों और अंतिम संस्कार की व्यवस्था को सुरक्षित तरीके से जारी रखा जाए।

वरुणा नदी का पानी सलारपुर तक पहुंचा

गंगा के साथ वरुणा नदी का बढ़ता जलस्तर भी स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। सलारपुर क्षेत्र में वरुणा का पानी रेलवे लाइन के पास तक पहुंच गया है। आसपास के कुछ मकानों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश करने की सूचना है।

नक्खीघाट से हुकुलगंज, बघवानाला, ढेलवरिया और चौकाघाट तक वरुणा कॉरिडोर के नीचे पानी भरा हुआ है। पुराने पुल के पास पुलकोहना क्षेत्र में नाले से सटे मकानों की चौखट तक पानी पहुंचने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।

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गोमती और छोटी सरयू में भी बढ़ाव

पूर्वांचल की अन्य नदियों में भी जलस्तर की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आजमगढ़ में छोटी सरयू का जलस्तर 66.48 मीटर दर्ज किया गया और वहां फिलहाल स्थिति स्थिर बताई गई है। जौनपुर में गोमती नदी का जलस्तर मंगलवार सुबह आठ बजे 67.96 मीटर रहा। यहां नदी करीब छह सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। नदियों के बढ़ते पानी को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव गतिविधियों को तेज रखना जरूरी हो गया है।

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