‘टॉक्सिक’ मूवी रिव्यू: यश का स्वैग और एक्शन शानदार

टॉक्सिक मूवी रिव्यू में जानिए यश की दमदार एक्टिंग, शानदार एक्शन, स्टाइलिश विजुअल्स और गीतू मोहनदास के निर्देशन की खूबियां और कमियां।

News Saga Desk

टॉक्सिक मूवी रिव्यू की बात करें तो यश की यह बहुप्रतीक्षित फिल्म बड़े पर्दे पर एक ऐसी गैंगस्टर दुनिया पेश करती है, जो अपने स्टाइल, विजुअल ट्रीटमेंट और एक्शन के कारण शुरुआत से ही अलग नजर आती है। निर्देशक गीतू मोहनदास ने पारंपरिक गैंगस्टर ड्रामा के बजाय अपराध, सत्ता, परिवार, रिश्तों और बदले की भावना को जोड़कर एक अलग सिनेमाई दुनिया बनाने की कोशिश की है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश का जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस है, जो कई दृश्यों में पूरी तरह छा जाता है।

कहानी में अपराध के साथ परिवार और रिश्ते

फिल्म की कहानी अपराध की दुनिया से जुड़े एक ऐसे किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी सिर्फ गैंगस्टर की दुनिया तक सीमित नहीं है। राया और उसके बेटे टिकट के किरदारों के जरिए कहानी परिवार, वफादारी, सत्ता और रिश्तों की कई परतों को सामने लाती है।

जैसे-जैसे घटनाएं आगे बढ़ती हैं, अपराध की दुनिया में चल रहा ताकत का खेल पारिवारिक रिश्तों से जुड़ने लगता है। फिल्म में बदले और सत्ता संघर्ष के साथ भावनात्मक पहलुओं को भी जगह दी गई है। यही वजह है कि यह केवल मारधाड़ और गैंगवार की कहानी बनकर नहीं रह जाती। हालांकि, शुरुआती हिस्से में फिल्म अपनी दुनिया और किरदारों को स्थापित करने में थोड़ा समय लेती है।

यश का स्वैग है फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

टॉक्सिक मूवी रिव्यू में सबसे ज्यादा चर्चा यश के अभिनय और उनके किरदार के अंदाज की बनती है। राया और टिकट के किरदारों में यश अलग-अलग शेड्स दिखाते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज, संवाद अदायगी, स्वैग और एक्शन सीक्वेंस फिल्म को स्टारड्रिवन अपील देते हैं।

यश ने अपने किरदार को सिर्फ एक खतरनाक गैंगस्टर के रूप में पेश नहीं किया है। परिवार और रिश्तों से जुड़े दृश्यों में उनका भावनात्मक पक्ष भी दिखाई देता है। वहीं एक्शन दृश्यों में उनका आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस खास तौर पर प्रभावशाली है। कई मौकों पर कहानी से ज्यादा अभिनेता की मौजूदगी दर्शकों का ध्यान खींचती है।

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महिला किरदारों को भी मिला महत्व

फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत अहम भूमिकाओं में नजर आती हैं। अच्छी बात यह है कि इन किरदारों को केवल मुख्य अभिनेता के आसपास सीमित रखने के बजाय कहानी के घटनाक्रम और सत्ता के खेल में जगह दी गई है। नयनतारा फिल्म के पारिवारिक और भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती हैं। वहीं कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत अपने-अपने किरदारों के जरिए कहानी को आगे बढ़ाने में योगदान देती हैं।

टॉक्सिक मूवी

गीतू मोहनदास का निर्देशन फिल्म को एक विशिष्ट विजुअल पहचान देने में सफल रहता है। अपराध की दुनिया को रंगों, सेट डिजाइन, कॉस्ट्यूम, लाइटिंग और कैमरा वर्क के जरिए भव्य अंदाज में दिखाया गया है। कई फ्रेम बड़े पर्दे पर बेहद प्रभावशाली नजर आते हैं। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की डार्क और स्टाइलिश दुनिया को स्थापित करने में खास भूमिका निभाती है।

टॉक्सिक मूवी रिव्यू का एक अहम पहलू इसकी 3 घंटे 14 मिनट की लंबाई है। फिल्म की भव्यता और एक्शन के बावजूद कुछ हिस्सों में गति धीमी महसूस होती है। खासकर शुरुआती भाग में किरदारों और कहानी की दुनिया को स्थापित करने में अपेक्षाकृत ज्यादा समय लिया गया है।

फिल्म के निर्देशक गीतू मोहनदास हैं, जबकि मुख्य कलाकारों में यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत शामिल हैं। फिल्म की अवधि 3 घंटे 14 मिनट है और इसे एक्शन व गैंगस्टर ड्रामा के तौर पर पेश किया गया है।

फिल्म की लंबाई और कुछ धीमे हिस्से इसकी कमियां जरूर हैं, लेकिन यश का स्वैग और स्क्रीन प्रेजेंस इन्हें काफी हद तक संतुलित कर देते हैं। गीतू मोहनदास ने पारंपरिक गैंगस्टर कहानी से अलग दुनिया रचने की कोशिश की है, जिसमें अपराध के साथ परिवार, भरोसा और वफादारी जैसे भावनात्मक पहलुओं को भी जगह मिलती है।

रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)

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