झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023 को लेकर चल रहा विवाद अब झारखंड हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाई कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है। इसी बीच चयन प्रक्रिया से बाहर रह गए कुछ अभ्यर्थियों ने मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए हाई कोर्ट में Intervention Petition दाखिल की है।
NEWS SAGA DESK:
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023 को लेकर चल रहा विवाद अब झारखंड हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाई कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है। इसी बीच चयन प्रक्रिया से बाहर रह गए कुछ अभ्यर्थियों ने मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए हाई कोर्ट में Intervention Petition दाखिल की है।
हजारीबाग निवासी राजेश प्रसाद समेत अन्य अभ्यर्थियों ने अधिवक्ता कुमार हर्ष के माध्यम से याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कथित अनियमितताओं के बीच कई ऐसे अभ्यर्थी भी प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने परीक्षा में मेहनत के साथ प्रदर्शन किया था। इसलिए उन्हें भी मौजूदा न्यायिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

याचिका में परीक्षा के संचालन से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल खड़े किए गए हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि JPSC ने परीक्षा के डेटा प्रोसेसिंग और डिजिटल कार्यों के लिए TSR Data Processing Private Limited (TDPL) को जिम्मेदारी दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित एजेंसी को पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।
याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि ऐसी एजेंसी को इतनी महत्वपूर्ण सरकारी भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में जिम्मेदारी देना परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
याचिका में JPSC की सदस्य अणिमा हांसदा के कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि उन्होंने 11वीं से 13वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के परिणाम पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया था। उनके अनुसार, परिणाम में कुछ त्रुटियां थीं और इसकी जानकारी आयोग के अध्यक्ष को दी गई थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर आयोग के सभी संबंधित सदस्यों की सहमति नहीं ली गई थी।
अभ्यर्थियों ने परीक्षा के अंतिम चरण में अधिकारियों के तबादले और जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। याचिका के मुताबिक, मुख्य परिणाम तैयार होने से पहले तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्टोप्पा का तबादला कर दिया गया। उनके स्थान पर आए लोकेश मिश्रा के छुट्टी पर जाने के बाद उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से कथित तौर पर परिणाम पर हस्ताक्षर कराए गए। याचिका में यह भी कहा गया है कि श्वेता गुप्ता का नाम CID की जांच में सामने आया था और उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।
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