कोलकाता की सियालदह पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से जबरन शादी और यौन शोषण मामले में पति अमित प्रमाणिक को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से कानून और न्याय की व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। सियालदह स्थित विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक नाबालिग किशोरी का अपहरण कर जबरन शादी रचाने और उसका यौन शोषण करने के जुर्म में अभियुक्त पति को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सरकारी अभियोजकों का दावा है कि जबरन बाल विवाह और यौन शोषण से जुड़े मामलों में इस तरह की सख्त सजा सुनाए जाने की यह अपने आप में एक अनूठी और पहली मिसाल है।

अपहरण और जबरन विवाह का मामला मामला उत्तर कोलकाता के चितपुर थाना क्षेत्र का है। अदालत व पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चितपुर निवासी 30 वर्षीय आरोपी अमित प्रमाणिक ने पिछले वर्ष एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर लिया था और उसे भगा ले गया था। इसके बाद उसने किशोरी की सहमति के बिना उससे जबरन शादी कर ली और उसे अपने घर ले आया। आरोपी के परिजनों ने भी इस गैरकानूनी विवाह को स्वीकार करते हुए लड़की को बहू के रूप में अपना लिया था।
अस्पताल में जांच के दौरान खुला राज जबरन विवाह के कुछ समय बाद नाबालिग किशोरी गर्भवती हो गई। प्रसव पीड़ा होने पर उसे कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बच्चे के जन्म के समय जब अस्पताल प्रशासन द्वारा कागजातों और पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई, तब यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नवजात को जन्म देने वाली मां वास्तव में एक नाबालिग किशोरी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल अधिकारियों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। चितपुर थाने में त्वरित औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी पति अमित प्रमाणिक को पिछले साल दिसंबर महीने में गिरफ्तार कर लिया।
अदालत का फैसला और मुआवजा मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सियालदह पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया। सरकारी वकील असीम कुमार ने निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि माननीय न्यायाधीश ने पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत दोषी अमित प्रमाणिक को 20 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की स्थिति में अभियुक्त को 1 साल की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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