झारखंड-बिहार की काली कमाई विदेशों में: CBDT और FAIU का बड़ा एक्शन

NEWS SAGA DESK

बिहार और झारखंड के 150 से अधिक लोगों द्वारा विदेशों में ₹250 करोड़ से अधिक की काली कमाई खपाने का खुलासा हुआ है। FAIU और सीबीडीटी (CBDT) ने ई-समन भेजकर जवाब मांगा है।

झारखंड और बिहार से अवैध तरीके से अर्जित की गई ‘काली कमाई’ को देश से बाहर ले जाकर विदेशी धरती पर खपाने का एक बेहद गंभीर और बड़ा मामला उजागर हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), दुबई, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के विभिन्न देशों से भारत सरकार को मिले आधिकारिक वित्तीय इनपुट के आधार पर बिहार और झारखंड के 150 से अधिक व्यक्तियों की जांच शुरू कर दी गई है। प्राथमिक जांच में इन लोगों द्वारा विदेशों में 250 करोड़ रुपये से अधिक का अघोषित निवेश किए जाने की पुष्टि हुई है। संदिग्धों में झारखंड के 80 और बिहार के 70 लोग शामिल हैं।

झारखंड और बिहार

अंतरराष्ट्रीय संधियों से खुला काला धन का राज प्रभात खबर में छपी रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), नई दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संधियों के तहत संबंधित देशों की सरकारों और वित्तीय संस्थानों से यह गोपनीय डेटा प्राप्त हुआ था। भारत का 100 से अधिक देशों के साथ ‘कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड’ (CRS) और ‘ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन’ (AEOI) समझौता है। इस समझौते के तहत विदेशी बैंक और सरकारें भारतीय नागरिकों की वित्तीय परिसंपत्तियों का ब्योरा भारत सरकार के साथ नियमित रूप से साझा करती हैं।

सीबीडीटी से मिले इस डेटा के आधार पर आगे की कानूनी और तकनीकी जांच के लिए पूरी जानकारी पटना स्थित ‘बिहार-झारखंड विदेशी संपत्ति जांच इकाई’ (FAIU) को सौंपी गई। एफएआईयू की शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि इन सभी 150 लोगों ने भारत में अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय विदेशों में स्थित अपनी चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की जानकारी को जानबूझकर छिपाया था।

Karam Parv 2026: क्यों पूजी जाती है करम डाल? जानिए झारखंड के इस लोकपर्व की पूरी कहानी विदेशों में बेनामी संपत्ति, अघोषित रियल एस्टेट और सक्रिय बैंक खाते रखने वालों में केवल पटना, रांची और जमशेदपुर जैसे बड़े शहरों के अमीर व्यापारी या अधिकारी ही नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों के लोग भी शामिल हैं। सूची में हाजीपुर, सिवान, गया, बेगूसराय, बक्सर, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और धनबाद जैसे जिलों के निवासियों के नाम भी दर्ज हैं।

जांच के दौरान जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, यूएई, सिंगापुर और रूस समेत 15 से अधिक देशों के बैंकों में इन लोगों के नाम पर सक्रिय खाते मिलने की पुष्टि हुई है। इनमें से कई लोग अलग-अलग प्रकार के वीजा पर इन देशों में लंबे समय से निवास भी कर रहे हैं।

आयकर कानून और ब्लैक मनी एक्ट के तहत कड़े प्रावधान भारतीय आयकर कानून के अनुसार, भारत में रहने वाले किसी भी सामान्य निवासी (Resident) के लिए विदेश में मौजूद अपनी किसी भी चल-अचल संपत्ति, बैंक खाते, शेयर, म्यूचुअल फंड या वित्तीय हित का पूर्ण ब्योरा ITR के ‘शेड्यूल एफए’ (Schedule FA) में दर्ज करना अनिवार्य है।

इस जानकारी को छिपाना ‘ब्लैक मनी एक्ट, 2015’ के तहत एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है:

  • कर और जुर्माना: अघोषित विदेशी संपत्ति या आय के कुल मूल्य पर 30 प्रतिशत कर और 90 प्रतिशत तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यानी कुल देनदारी संपत्ति के वास्तविक मूल्य से भी अधिक हो सकती है।
  • अतिरिक्त जुर्माना: जानकारी छिपाने पर 10 लाख रुपये तक का अलग से आर्थिक दंड आरोपित किया जा सकता है।
  • जेल की सजा: अपराध की गंभीरता के आधार पर दोषी पाए जाने पर 3 से 10 वर्ष तक के कठोर कारावास का कानूनी प्रावधान है।

FAIU ने जारी किया ई-समन, पूछे 5 मुख्य सवाल एफएआईयू ने सभी 150 चिह्नों को ई-मेल के माध्यम से ई-समन जारी कर एक महीने के भीतर लिखित जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। एजेंसी ने करदाताओं से मुख्य रूप से निम्नलिखित 5 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है:

  1. विदेश में स्थित संपत्ति और बैंक खातों की जानकारी आयकर रिटर्न में क्यों नहीं दर्ज की गई?
  2. विदेश में निवेश की गई राशि और संपत्तियों को खरीदने का मूल आय स्रोत (Source of Income) क्या था?
  3. करदाता और उनके परिवार के सदस्यों की वास्तविक वार्षिक और मासिक आय कितनी है?
  4. जिस देश में संपत्ति पाई गई है, वहां परिवार का कौन सा सदस्य या रिश्तेदार वर्तमान में रह रहा है?
  5. संबंधित देश की अब तक कितनी बार यात्राएं की गई हैं और उनका उद्देश्य क्या था?

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