रजरप्पा मंदिर पुनरुद्धार पर हाई कोर्ट सख्त, मांगा डीपीआर

रजरप्पा मंदिर पुनरुद्धार मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने पर्यटन सचिव से 102 करोड़ के डीपीआर और फंडिंग पर शपथ पत्र मांगा है।

News Saga Desk

रांची। झारखंड के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल रजरप्पा मंदिर पुनरुद्धार मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। संजीव कुमार सिंह की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने पर्यटन विभाग के सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पूछा है कि मंदिर के पुनरुद्धार के लिए तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है और प्रस्तावित योजना के लिए आवश्यक राशि की व्यवस्था किस मद से की जाएगी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। पूर्व आदेश के अनुपालन में रामगढ़ के उपायुक्त और पर्यटन विभाग के सचिव अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अदालत ने रजरप्पा मंदिर पुनरुद्धार योजना की प्रगति के साथ-साथ इसके लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी।

102 करोड़ रुपये का तैयार किया गया है डीपीआर

सरकार की ओर से रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए करीब 102 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है। सुनवाई के दौरान पर्यटन सचिव की ओर से अदालत को बताया गया कि तैयार डीपीआर की अनुमानित लागत काफी अधिक है। इसी वजह से इससे संबंधित संचिका विभागीय मंत्री के पास भेजी गई है।

सरकार के इस जवाब के बाद हाई कोर्ट ने पर्यटन सचिव को शपथ पत्र के माध्यम से पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। अदालत यह जानना चाहती है कि डीपीआर पर विभागीय स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है और इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था किस स्रोत या मद से की जाएगी।

हाई कोर्ट ने मांगा फंडिंग का स्पष्ट जवाब

रजरप्पा मंदिर पुनरुद्धार को लेकर हाई कोर्ट का मुख्य जोर योजना की प्रगति और वित्तीय व्यवस्था पर है। अदालत ने पर्यटन सचिव से कहा है कि शपथ पत्र में डीपीआर की वर्तमान स्थिति के साथ प्रस्तावित परियोजना के लिए फंडिंग का स्रोत भी स्पष्ट किया जाए।

रजरप्पा

कोर्ट के इस निर्देश से यह साफ है कि मंदिर के पुनरुद्धार से जुड़ी योजना में केवल डीपीआर तैयार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके क्रियान्वयन के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। सरकार को अब अगली सुनवाई में इस संबंध में विस्तृत स्थिति अदालत के समक्ष रखनी होगी।

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13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

झारखंड हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। हालांकि अगली सुनवाई में रामगढ़ के उपायुक्त और पर्यटन विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने से छूट दे दी गई है।

दोनों अधिकारी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। इससे पहले सोमवार की सुनवाई में दोनों अधिकारी अदालत के समक्ष उपस्थित हुए थे।

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