झारखंड की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा में रहे बड़गांई की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दायर दो याचिकाएं अदालत के सामने आईं।
NEWS SAGA DESK
झारखंड की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा में रहे बड़गांई की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दायर दो याचिकाएं अदालत के सामने आईं। इनमें एक याचिका PMLA की विशेष अदालत द्वारा डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ है, जबकि दूसरी बिना अभियोजन स्वीकृति के संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती देती है। दोनों मामलों में अगली सुनवाई 4 नवंबर को निर्धारित की गई है।
ED ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय
डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। वहीं, अभियोजन स्वीकृति के बिना संज्ञान लेने के आदेश से संबंधित याचिका में मुख्यमंत्री की ओर से समय की मांग की गई। इस दूसरे मामले में ED पहले ही अपना जवाब अदालत में दाखिल कर चुका है। सुनवाई के दौरान केंद्रीय एजेंसी की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा। अब दोनों याचिकाओं पर 4 नवंबर को आगे की सुनवाई होगी।
क्या है दोनों याचिकाओं का मामला?
मुख्यमंत्री की ओर से दायर पहली याचिका में PMLA कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें डिस्चार्ज पिटीशन खारिज कर दी गई थी। डिस्चार्ज पिटीशन के जरिए आरोपी मुकदमे की आगे की प्रक्रिया से मुक्त किए जाने की मांग करता है। दूसरी याचिका में अभियोजन स्वीकृति के बिना मामले में संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई है। इन दोनों याचिकाओं पर हाईकोर्ट का आगे का रुख मामले की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अदालत में सुनवाई जारी है और किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है।
17 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन
बड़गांई जमीन मामले में ED की विशेष अदालत 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन कर चुकी है। आरोपियों में राजस्वकर्मी भानु प्रताप प्रसाद, झामुमो नेता अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, बिजेंद्र सिंह, बिपिन सिंह, प्रियरंजन सहाय, मनोज कुमार यादव, कुमार राजश्री, राजकुमार पाहन, संजीत कुमार, शेखर कुशवाहा, तापस घोष, मोहम्मद इरशाद अख्तर, अफसर अली और मोहम्मद सद्दाम हुसैन सहित अन्य लोग शामिल हैं। आरोप गठन मुकदमे की प्रक्रिया का एक चरण है। इससे अपने आप किसी आरोपी का दोष साबित नहीं होता। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही के दौरान आरोपों पर विचार किया जाएगा।
जमीन मामले की जांच में ED ने की थी कार्रवाई
बड़गांई की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच के दौरान ED ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के क्रम में झामुमो नेता अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह और जमीन कारोबार से जुड़े कुछ लोगों के ठिकाने भी जांच के दायरे में आए थे। जांच के बाद ED ने आरोपियों के खिलाफ PMLA की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब मुख्यमंत्री की ओर से दायर दोनों याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
4 नवंबर की सुनवाई पर रहेगी नजर
बड़गांई जमीन मामले में अब झारखंड हाईकोर्ट में 4 नवंबर को अगली सुनवाई होगी। एक ओर ED को डिस्चार्ज पिटीशन से जुड़े मामले में अपना जवाब दाखिल करना है, वहीं दूसरी याचिका पर भी आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है। अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों और अदालत की कार्यवाही पर नजर रहेगी।
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