एंटी पेपर लीक बिल 2026 संसद में पेश। पेपर लीक मामलों में 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ तक जुर्माना, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और जांच की समय-सीमा जैसे कड़े प्रावधान प्रस्तावित।
एंटी पेपर लीक बिल 2026 को केंद्र सरकार ने संसद में पेश किया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पर लोकसभा में विस्तृत चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में पेपर लीक की घटनाएं नई नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी कई बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आए थे, लेकिन उस समय इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी व्यवस्था विकसित नहीं की गई।

संसद में क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
एंटी पेपर लीक बिल 2026 पर चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती बोर्ड, 2011 की एआईईईई, 2012 की एम्स प्रवेश परीक्षा, 2013 की महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा, उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा, तमिलनाडु लोक सेवा आयोग और पश्चिम बंगाल जॉइंट एंट्रेंस जैसी कई परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए थे।
उन्होंने कहा कि 1992 और 2010 में गठित समितियों ने केंद्रीय परीक्षा तंत्र को मजबूत करने की सिफारिश की थी, लेकिन उन सुझावों पर अमल नहीं किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई संस्थागत कदम उठाए हैं।
भर्ती एजेंसियों और NTA का जिक्र
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में केंद्र सरकार के अधीन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) जैसी प्रमुख भर्ती एजेंसियां कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की स्थापना उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से की गई थी। उनके अनुसार, वर्ष 2024 में लाए गए कानून को और प्रभावी बनाने के लिए अब यह संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया है।

2026 संशोधन बिल में क्या होंगे प्रमुख बदलाव?
एंटी पेपर लीक बिल 2026 के तहत सजा और आर्थिक दंड को पहले की तुलना में अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
व्यक्तिगत दोषियों के लिए प्रस्तावित प्रावधान
- जेल की सजा 3–5 वर्ष से बढ़ाकर 5–10 वर्ष।
- जुर्माना ₹10 लाख तक से बढ़ाकर ₹50 लाख तक।
सर्विस प्रोवाइडर और परीक्षा एजेंसियों के लिए
- अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़।
- ब्लैकलिस्टिंग अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष।
पेपर लीक माफिया के खिलाफ
- जेल की सजा 5–10 वर्ष से बढ़ाकर 7–10 वर्ष।
- अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़।
इसके अलावा मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन तथा जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का प्रस्ताव भी शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों के कारण लाखों अभ्यर्थियों को परीक्षा दोबारा देनी पड़ी और भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने पहले 2024 का कानून लागू किया था। अब 2026 के संशोधन के जरिए दंडात्मक प्रावधानों को और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि संगठित तरीके से होने वाली परीक्षा धांधली पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इसे भी देखें…Jharkhand Maoist Surrender: 16 माओवादियों ने छोड़े हथियार, पुलिस की बड़ी सफलता
विपक्ष को दी गई विस्तृत चर्चा की पेशकश
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में छह घंटे की चर्चा तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर आठ घंटे किया गया। यदि विपक्ष और अधिक समय चाहता है, तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है। सरकार का कहना है कि इस कानून पर सभी दलों की राय महत्वपूर्ण है और व्यापक विमर्श के बाद प्रभावी कानूनी व्यवस्था बनाई जाएगी।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और विश्वसनीयता को बहाल करना है। उनके अनुसार, प्रस्तावित संशोधन कानून पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के खिलाफ देश में अब तक का सबसे सख्त कानूनी ढांचा तैयार करेगा।
No Comment! Be the first one.