Ethanol Blending पर केएन त्रिपाठी का हमला, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

NEWS SAGA DESK

पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने इथेनॉल मिश्रण नीति पर सवाल उठाते हुए वैज्ञानिक आधार सार्वजनिक करने और केंद्र सरकार से तत्काल समीक्षा की मांग की।

Ethanol Blending को लेकर झारखंड के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने केंद्र सरकार की नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को पलामू परिसदन में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने पेट्रोल और डीजल में इथेनॉल मिलाकर बेचे जाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस नीति के वैज्ञानिक आधार को सार्वजनिक किए बिना इसे लागू कर रही है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इससे आम उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हो रहा है और कुछ उद्योगपतियों को लाभ मिल रहा है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान Ethanol Blending को लेकर उन्होंने कई सवाल उठाए और सरकार से इस नीति की समीक्षा करने की मांग की।

20 रुपये प्रति लीटर इथेनॉल को 101 रुपये में बेचने का आरोप

केएन त्रिपाठी ने दावा किया कि लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कीमत वाला इथेनॉल पेट्रोल और डीजल में मिलाकर 101 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे करोड़ों रुपये का अतिरिक्त लाभ कुछ लोगों को मिल रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रतिदिन बड़ी मात्रा में इथेनॉल पेट्रोल और डीजल में मिलाया जा रहा है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में उन्होंने पत्रकार वार्ता के दौरान कोई सार्वजनिक दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

इंजन की उम्र कम होने का जताया दावा

Ethanol Blending नीति पर अपनी आपत्ति जताते हुए त्रिपाठी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाए जाने से वाहनों के इंजन की उम्र कम हो सकती है। उनके अनुसार यह देश के करोड़ों वाहन मालिकों से जुड़ा गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि देश में अधिकांश वाहन पारंपरिक पेट्रोल और डीजल इंजन पर आधारित हैं। ऐसे में यदि ईंधन की संरचना बदली जा रही है तो पहले वाहन मालिकों की सुरक्षा और इंजन की अनुकूलता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

पूर्व मंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि Ethanol Blending से संबंधित सभी वैज्ञानिक अध्ययन और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं। उनका कहना है कि यदि सरकार के पास इस नीति के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण हैं तो उन्हें जनता के सामने रखा जाना चाहिए।

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उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि इथेनॉल मिश्रित ईंधन का व्यापक उपयोग किया जा रहा है तो वाहनों में आवश्यक तकनीकी बदलाव या इथेनॉल अनुकूल किट लगाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सरकार से नीति की समीक्षा की अपील

केएन त्रिपाठी ने केंद्र सरकार से इस पूरी नीति की समीक्षा करने और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगों में किन-किन कंपनियों और संस्थाओं की भागीदारी है।

हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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