बहराइच और तराई क्षेत्र में जंगली जानवरों के लगातार हमलों से ग्रामीणों में डर का माहौल है। लोगों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाने, पिंजरे लगाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग की है।
बहराइच में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में हुए हमलों के बाद जिले और आसपास के तराई क्षेत्रों के ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि रात के समय घर से बाहर निकलना तो दूर, घर के भीतर भी पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं होता। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।

ग्रामीणों ने वन विभाग से की विशेष मांग
बहराइच में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ने के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन इलाकों में हमले हुए हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जाए और संवेदनशील स्थानों पर पिंजरे लगाए जाएं ताकि जंगली जानवरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सके।
इसके अलावा रात के समय वन विभाग की गश्त बढ़ाने, प्रभावित गांवों में नियमित पेट्रोलिंग कराने और लोगों को समय-समय पर सतर्क करने की भी मांग की गई है।
रात में घरों से निकलने से डर रहे लोग
तराई क्षेत्र के कई गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही पूरा इलाका सन्नाटे में डूब जाता है। पहले जहां लोग देर रात तक खेतों और आसपास के इलाकों में काम करते थे, वहीं अब अंधेरा होने के बाद लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है। कई परिवारों ने रात के समय अकेले बाहर निकलना पूरी तरह बंद कर दिया है।

वन क्षेत्र से सटे गांवों में ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल से सटे गांवों में मानव और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ने के कारण इस तरह की घटनाएं अधिक होती हैं। भोजन और पानी की तलाश में जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों की ओर आ जाते हैं, जिससे संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाती है।
ऐसे क्षेत्रों में नियमित निगरानी, चेतावनी प्रणाली और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी मानी जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
बहराइच में जंगली जानवरों का आतंक कम करने के लिए विशेषज्ञ कई उपाय सुझा रहे हैं। इनमें प्रभावित क्षेत्रों में सीसीटीवी और ट्रैप कैमरे लगाना, रात्रि गश्त बढ़ाना, गांवों में जागरूकता अभियान चलाना और वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना शामिल है।
इसके अलावा स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के साथ ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
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ग्रामीणों की मांग और प्रशासन से उम्मीद
लगातार हो रही घटनाओं के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग जल्द ही ठोस कदम उठाएगा। लोगों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाने, गश्त बढ़ाने और त्वरित रेस्क्यू टीम तैनात करने से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
ग्रामीणों ने यह भी अपील की है कि प्रशासन समय-समय पर गांवों में जागरूकता अभियान चलाए, ताकि लोग जंगली जानवर दिखने पर घबराने के बजाय सही तरीके से सूचना देकर अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में सतर्कता का माहौल है और लोग वन विभाग की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू किए जाते हैं, तो भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता है।
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