मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट में रोहुआ में PNG पाइप फटने से 5 स्कूली छात्राएं बेहोश हो गईं। लगातार हो रही घटनाओं ने पाइपलाइन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट ने बढ़ाई चिंता
मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट की घटना ने एक बार फिर शहर में पाइपलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुशहरी प्रखंड के रोहुआ इलाके में निर्माण कार्य के दौरान PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे गैस का तेज रिसाव शुरू हो गया। गैस के प्रभाव से पास के स्कूल की पांच छात्राएं बेहोश हो गईं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन के साथ गैस कंपनी की टीम मौके पर पहुंची। समय रहते गैस आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

पहले भी कई बार फट चुकी है PNG पाइपलाइन
मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शहर के माड़ीपुर, सिकंदरपुर और बेला इंडस्ट्रियल एरिया में सड़क और नाला निर्माण के दौरान PNG पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है। हर बार इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की मेंटेनेंस टीम ने तत्काल गैस सप्लाई बंद कर स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन लगातार दोहराई जा रही घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर गैस आपूर्ति बंद नहीं की जाती, तो आग लगने या विस्फोट जैसी बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
निर्माण एजेंसियों की लापरवाही पर सवाल
IOCL के अधिकारियों ने पहले ही जिला प्रशासन को पत्र लिखकर इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया था। अधिकारियों के अनुसार, सड़क और नाला निर्माण कराने वाली कई एजेंसियां खुदाई शुरू करने से पहले गैस कंपनी को सूचना नहीं देतीं।
बिना पाइपलाइन की सटीक जानकारी के की गई खुदाई के कारण गैस पाइपलाइन बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही है। इससे न केवल जनसुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

32 हजार से अधिक घरों तक पहुंच चुका PNG नेटवर्क
मुजफ्फरपुर में प्राकृतिक गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में 32,341 से अधिक घर PNG नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, जबकि 15 हजार से ज्यादा परिवारों को नियमित गैस आपूर्ति मिल रही है।
अखाड़ाघाट, जीरोमाइल, गौशाला रोड, बावन बीघा, मिठनपुरा, बेला और आसपास के कई इलाकों में नई पाइपलाइन बिछाने और गैस कनेक्शन देने का कार्य जारी है। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
PNG गैस रिसाव क्यों होता है खतरनाक?
मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट जैसी घटनाएं इसलिए गंभीर मानी जाती हैं क्योंकि PNG में मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है। यह अत्यधिक ज्वलनशील होती है और गैस रिसाव के दौरान यदि किसी प्रकार की चिंगारी, बिजली का स्पार्क या आग का स्रोत संपर्क में आ जाए तो बड़ा विस्फोट हो सकता है।
इसके अलावा गैस हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देती है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। रोहुआ की घटना में छात्राओं के बेहोश होने की वजह भी गैस का प्रभाव माना जा रहा है।
गैस रिसाव होने पर क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में गैस की तेज गंध महसूस हो तो घबराने के बजाय तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए।
- सुरक्षित स्थिति में मुख्य गैस वाल्व बंद करें।
- प्रभावित क्षेत्र में बिजली के स्विच, मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग न करें।
- सभी दरवाजे और खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन बढ़ाएं।
- तुरंत खुले और सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
- सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद गैस वितरण कंपनी या आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दें।
इन सावधानियों का पालन कर बड़े हादसे की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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बेहतर समन्वय की जरूरत
मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट के बाद प्रशासन, गैस कंपनी और निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता फिर से चर्चा में है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निर्माण कार्य से पहले संबंधित एजेंसियों को पाइपलाइन का डिजिटल नक्शा उपलब्ध कराया जाना चाहिए और संयुक्त निरीक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
इसके साथ ही निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन और नियमित निगरानी जरूरी है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।
रोहुआ की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि शहर में तेजी से फैल रहे PNG नेटवर्क के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी समान गति से मजबूत करना होगा। प्रशासन, गैस कंपनी और निर्माण एजेंसियों के बेहतर तालमेल से ही ऐसे हादसों को रोका जा सकता है और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
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