News Saga Desk
पश्चिम बंगाल में वर्षों से अटकी कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को अब गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन या बेहतर समन्वय वाली “डबल इंजन सरकार” के मॉडल से यह उम्मीद मजबूत हुई है कि लंबे समय से लंबित रेलवे प्रोजेक्ट्स जल्द पूरे हो सकते हैं।
रेल मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कई नई रेल लाइनों, थर्ड लाइन और मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक अड़चनों के कारण वर्षों से रुकी हुई हैं। कुछ परियोजनाएं तो 2016 से ही अधर में लटकी हुई हैं। इसके अलावा कोलकाता मेट्रो विस्तार की कई योजनाएं भी धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं।
हाल के विकास के तहत केंद्र सरकार ने पूर्वी भारत में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें नए ट्रैक, स्टेशन पुनर्विकास और सुरक्षा सुधार शामिल हैं। साथ ही लगभग 192 किलोमीटर नई रेल लाइनों की मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं भी स्वीकृत की गई हैं, जिनसे यात्री और माल ढुलाई दोनों में सुधार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य और केंद्र के बीच समन्वय बेहतर होता है तो भूमि अधिग्रहण जैसी प्रमुख बाधाएं कम हो सकती हैं। इससे लंबित परियोजनाएं तेज़ी से आगे बढ़ेंगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बड़ा लाभ मिलेगा।
डबल इंजन सरकार के तहत रेलवे विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, जिससे न केवल यात्रा सुविधाएं बेहतर होंगी बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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