बिहार की आर्थिक संरचना में बड़ा बदलाव। NSO रिपोर्ट के अनुसार 91.77% छोटे और मझोले कारोबार पटना के बाहर अन्य जिलों में संचालित। मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर बने नए कमर्शियल हब। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
बिहार की आर्थिक संरचना में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में छोटे और मझोले कारोबार अब केवल राजधानी पटना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे प्रदेश के विभिन्न जिलों में तेजी से पैर पसार रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के कुल प्रतिष्ठानों का 91.77 प्रतिशत हिस्सा पटना के बाहर अन्य जिलों में स्थित है, जबकि अकेले राजधानी पटना की हिस्सेदारी इसमें महज 8.23 प्रतिशत है। इस पहली बार जारी जिलावार आंकड़ों से यह स्पष्ट हो गया है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां काफी तेजी से मजबूत हो रही हैं।

43 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों से बदला बिहार का नक्शा NSO रिपोर्ट के अनुसार, पूरे बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के तहत कुल 43.19 लाख से अधिक छोटे-बड़े प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। इन प्रतिष्ठानों में कुल 58.51 लाख से ज्यादा लोग रोजगार पा रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि कुल रोजगार का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा (यानी करीब 43.6 लाख श्रमिक) ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में केंद्रित है, जबकि शहरी क्षेत्रों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत (लगभग 16.6 लाख श्रमिक) है। इसके अलावा, इन असंगठित इकाइयों में लगभग 9.27 लाख महिला श्रमिक भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं, जो महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत तस्वीर पेश करती हैं।
मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और छपरा बने कमर्शियल पावरहाउस राजधानी पटना के ठीक बाद उत्तर बिहार में मुजफ्फरपुर, दक्षिण बिहार में गया, अंग क्षेत्र में भागलपुर और सारण प्रमंडल में छपरा राज्य के सबसे बड़े कमर्शियल और सर्विस हब के रूप में उभरे हैं। भारी जनसंख्या, पारंपरिक मंडियों और बेहतर ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी के कारण इन जिलों में छोटे कारखानों और ट्रेड का एक बड़ा क्लस्टर स्थापित हो चुका है। इसी प्रकार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी और दरभंगा जैसे घनी आबादी वाले जिलों में रिटेल ट्रेड, हथकरघा, कारीगरी और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स का जाल फैला हुआ है। वहीं, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सहरसा और सुपौल में एग्री-बिजनेस, वीकली हाट-बाजारों और ट्रांसपोर्ट सर्विस पर आधारित “सिंगल-ओनरशिप” (एकल स्वामित्व) वाली छोटी दुकानों की प्रधानता है।
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