बिहार में गंगा, कोसी, गंडक और बागमती समेत कई नदियां उफान पर हैं। पटना से भागलपुर तक बाढ़ का खतरा बढ़ा, तटीय इलाकों में अलर्ट जारी।
बिहार में बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद Bihar Flood का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। गंगा, कोसी, सोन, गंडक और बागमती समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से तटीय इलाकों में चिंता बढ़ गई है। पटना के दियारा क्षेत्रों में स्थिति को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर गुरुवार दोपहर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में जलस्तर और बढ़ने की संभावना जताई गई है।

गंगा समेत कई नदियों का बढ़ा जलस्तर
Bihar Flood की स्थिति में गंगा नदी सबसे अहम भूमिका निभा रही है। पटना के गांधी घाट के अलावा दीघाघाट, हाथीदह, साहिबगंज और कहलगांव में भी गंगा का जलस्तर लगातार निगरानी में है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, इन क्षेत्रों में आने वाले दिनों में नदी का पानी खतरे के निशान को पार कर सकता है।
सोन नदी में भी इस मौसम का अब तक सबसे अधिक जलप्रवाह दर्ज किया गया है। इंद्रपुरी बराज पर सोन का जलप्रवाह 2.94 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। इससे नदी के आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
वहीं, गंडक नदी का जलस्तर गोपालगंज जिले के डुमरियाघाट में खतरे के निशान से 61 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। हालांकि, यहां जलस्तर में कमी आने की संभावना बताई गई है।
कई जिलों में मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
बिहार के अलग-अलग हिस्सों में नदियों का बढ़ता जलस्तर स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। सीवान जिले के दरौली में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 13 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। वहीं मुजफ्फरपुर के बेनीवाद में बागमती नदी 37 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी।
इन परिस्थितियों को देखते हुए नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने के साथ जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन अलर्ट, सुरक्षित स्थानों पर भेजे जा रहे लोग
नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने पहले से तैयारियां शुरू कर दी हैं। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। जरूरत वाले इलाकों में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
प्रशासन की चुनौती केवल जलस्तर पर नजर रखना नहीं, बल्कि कटाव, जलभराव और विस्थापन की स्थिति से निपटना भी है। संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव से जुड़ी तैयारियों को मजबूत रखना जरूरी है।
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