बुद्धिः ज्ञान का उपकरण
संसार प्रत्यक्ष है। संसार समझने के लिए प्रकृति-प्रदत्त पाँच इन्द्रियाँ हैं। आँख से देखते हैं, कानों से सुनते हैं। त्वचा से स्पर्श करते हैं। जीभ से स्वाद लेते हैं और नाक से सूंघते हैं। संक्षेप में रूप, रस, गंध, ध्वनि और स्वाद ही संसार समझने के उपकरण हैं। मन को इनका स्वामी बताया गया है। दृश्य पर मन न लगे तो देखना व्यर्थ हो जाता है। गीत-संगीत में मन न लगे तो सुनना बेकार। यही बात सभी इन्द्रियों पर लागू होती है। पढ़ता-सुनता आया हूँ कि इन्द्रियों से प्राप्त सूचना मस्तिष्क तक जाती है। मस्तिष्क निर्णय लेता है। मस्तिष्क में लाखों कोष हैं। इसमें अध्ययन-अनुभव के संग्रह हैं।
पाकिस्तान का अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक करना बंद अंधेरी सुरंग में घुसने जैसा
पाकिस्तानी वायु सेना के लड़ाकू विमानों की 24 दिसंबर की रात अफगानिस्तान के पूर्वी पाकटीका प्रांत में एयर स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों की कड़वाहट लगातार बढ़ रही है। पाकिस्तान ने लड़ाकू विमानों से अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के 4 आतंकी ठिकानों पर बम बरसाने का दावा किया है। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी कमांडर शेर जमान, कमांडर अबू हमजा, कमांडर अख्तर मुहम्मद और टीटीपी का मीडिया संगठन उमर मीडिया इन
ग्राहक सशक्तिकरण ही ‘ग्राहक संप्रभुता’ का मार्ग
भारतीय चिंतन के दृष्टिकोण से अर्थव्यवस्था के केंद्र बिंदु ‘ग्राहक संप्रभुता’ पर विचार करने से पहले ‘ग्राहक’ शब्द का अर्थ समझना आवश्यक है। क्योंकि वैश्विक ग्राहक आंदोलन ‘ग्राहक’ को बाजार में की जाने वाली खरीद-बिक्री की गतिविधियों तक ही सीमित रखता है। जबकि ‘ग्राहक’ शब्द अंग्रेजी में ‘उपभोक्ता’ या ‘कस्टमर’ का पर्याय नहीं है।
किसानों की बुलंद आवाज़ थे चौधरी चरण सिंह
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व्यक्ति नहीं विचारधारा थे। चौधरी चरण सिंह ने हमेशा यह साबित करने की कोशिश की थी कि किसानों को खुशहाल किए बिना देश का विकास नहीं हो सकता। उनकी नीति किसानों व गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की थी। वे कहते थे कि देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है। उनका कहना था कि भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं है। जिस देश के लोग भ्रष्ट होंगे वो देश कभी तरक्की नहीं कर सकता।
श्रीनिवास रामानुजन : संख्याओं के जादूगर
प्रतिवर्ष 22 दिसम्बर को भारत में ‘राष्ट्रीय गणित दिवस’ मनाया जाता है, जो देश के महान् गणितज्ञों में से एक श्रीनिवास रामानुजन की स्मृति में उनके जन्मदिवस पर मनाया जाता है। करीब एक दशक पहले चेन्नई में रामानुजन की 125वीं जयंती समारोह में गणित में उनके अविस्मरणीय योगदान को याद कर उन्हें सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष 22 दिसम्बर को ‘राष्ट्रीय गणित दिवस’ मनाए जाने का निर्णय लिया गया था।
महाकुंभ का आध्यात्मिक, वैज्ञानिक व आर्थिक महत्व
आधुनिकता की उन्मत्त गति की विशेषता वाली दुनिया में, कुछ ही आयोजन ऐसे होते हैं जो लाखों लोगों को अपने से बड़े उद्देश्य की खोज में एकजुट करने की क्षमतारखते हैं। महाकुंभ मेला, 12 वर्षों की अवधि में चार बार होने वाला एक श्रद्धेय मेला, इस उद्देश का उदाहरण है।कुंभ मेला, दुनिया भर में सबसे बड़ा शांतिपूर्ण सम्मेलन है, जिसमें लाखों तीर्थयात्री आते हैं जो अपने पापों को शुद्ध करने और आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त करने के लिए पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं।
आधुनिक जीवन में ध्यान की प्रासंगिकता
ध्यान किसी तरह का धार्मिक उपक्रम नहीं है। यह बाहर से हट कर अंदर के अनुभवों को सम्बोधित करने वाला वैचारिक (रिफलेक्टिव) प्रयास है। एकाग्रता तथा अवगत या सचेत होना ही इसका मुख्य आधार है जो वर्तमान में बने रहने और मन की शांति को रेखांकित करता है। दरअसल आँख, कान, नाक, त्वचा आदि हमारे सभी संग्राहक बाहर की दुनिया से लगातार उद्दीपक लाते रहते हैं और उस सारी सामग्री की हमारे मन को व्याख्या करनी पड़ती है।
उस्ताद जाकिर हुसैन : थम गई तबले की थाप
संगीत संसार में तबले को एक नया आयाम देने और अपनी कला से भारत को विश्वपटल पर पहचान दिलाने वाले तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन अब इस संसार में नहीं रहें। उनकी अद्वितीय प्रतिभा और साधना ने तबले को एक नई पहचान दिलाई। जाकिर हुसैन ने तबला वादन की कला अपने पिता और गुरु उस्ताद अल्ला रक्खा से सीखी। अल्ला रक्खा स्वयं भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान तबला वादकों में से एक थे। जाकिर ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाया। जाकिर हुसैन का संगीत तकनीकी दक्षता का एक उत्कृष्ट प्रदर्शन था।
पूरा दिन बिजी रहने के चलते नहीं बिता पाते बच्चों संग समय तो ये उपाय आज़माएं और संजोएं यादों का पिटारा
आज की व्यस्त दिनचर्या में, माता-पिता अक्सर ऑफिस की ज़िम्मेदारियों के कारण बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पाते। हालांकि, बच्चों के साथ हर दिन कुछ समय बिताना उनके भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, भले ही यह समय केवल एक घंटा ही क्यों न हो। इतना समय भी बच्चों के विकास
जलवायु परिवर्तन और भारत का दृष्टिकोण
जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत का सह-लाभ दृष्टिकोण विकास लक्ष्यों को पर्यावरणीय उद्देश्यों के साथ संरेखित करने का प्रयास करता है। साथ ही जलवायु चुनौतियों का समाधान करते हुए सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करता है। आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों को एकीकृत करके, इस रणनीति का उद्देश्य उत्सर्जन को कम करना और लचीलापन बढ़ाना है।