दिव्यांग जनों को मिले बराबरी का अधिकार
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1992 में हर वर्ष 3 दिसम्बर को अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस के रूप में मनाने घोषणा की गयी। इसका उद्देश्य समाज के सभी क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को बढ़ावा देना और राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन में दिव्यांग लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। मगर आज भी लोगों को तो इस बात का भी पता ही नहीं होता है कि हमारे आस-पास कितने दिव्यांग रहते हैं। उन्हे समाज में बराबरी का अधिकार मिल रहा है कि नहीं।
देवेंन्द्र फडणवीस : लो लौट आया समुंदर!
गढ़चिरौली के घने जंगलों से लेकर मुंबई के मलाबार हिल तक फैले महाराष्ट्र के सियासी फलक पर फिलहाल एक ही नाम गूंज रहा है- देवेन्द्र गंगाधरराव फडणवीस। तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले फडणवीस ने 2019 में विरोधियों को चेताया था, “मैं समुंदर हूं, मेरे किनारों पे घर मत बनाना।” उस वक्त उनकी खूब हंसी उड़ाई गई थी। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में लौटे फडणवीस ने इसे सच कर दिखाया।
डॉलर का दबदबा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था
यह संकेत कहीं से भी अच्छे नहीं कहे जा सकते, अमेरिका के साथ भारत की कारोबारी स्थिति अप्रत्याशित है और देश के बड़े अर्थशास्त्री संभावित दिक्कतों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। वस्तुतःअमेरिका के साथी और विरोधी दोनों डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। इस बात के साफ संकेत हैं कि उनका दूसरा कार्यकाल मौजूदा विश्व व्यवस्था के लिए उनके पहले कार्यकाल की तुलना में अधिक अप्रत्याशित और शायद अधिक उथल-पुथल भरा हो सकता है और भारत भी इससे सुरक्षित नहीं रहेगा।