News Saga Desk
रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के पुरोधा दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन राज्य ही नहीं, देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका पार्थिव शरीर कल झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुआ। अंतिम विदाई के मौके पर हजारों की संख्या में लोग उमड़े, जिन्होंने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने ट्वीट में लिखा – “आज नेमरा में सुबह का सूरज भी उदास था… वीर दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें! अमर रहें! अमर रहें!” इस संक्षिप्त संदेश के जरिए उन्होंने उस गहरे दुख और भावुकता को साझा किया, जो एक बेटे, एक राजनीतिक उत्तराधिकारी और झारखंडी जनता के प्रतिनिधि के रूप में वह महसूस कर रहे हैं।
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को नेमरा गांव में हुआ था। उन्होंने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया और कई बार जेल भी गए। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और आदिवासी राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक रहे। देश के कोयला मंत्री रह चुके शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री भी बने।
उनके पुत्र और विधायक बसंत सोरेन ने ट्वीट कर लिखा –
मेरे पिता, मेरे पथ प्रदर्शक दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी आज पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके बिना मैं टूट गया हूँ। उनका संघर्ष, आदर्श और आशीर्वाद ही मेरी अंतिम पूँजी हैं। जब तक साँस चलेगी, उनके सपनों के अनुरूप झारखंड को सजाने-संवारने के लिए अपना पल-पल समर्पित करूंगा।”
उन्होंने आगे लिखा – “बाबा… आप चले गए, पर आपकी छाया, आपके संस्कार और आपके सपने हमेशा मेरे साथ रहेंगे। मैं निःशब्द हूं… आज सिर्फ आपका आशीर्वाद और आपकी यादें हैं। ॐ शांति।”
शिबू सोरेन के निधन के बाद से पूरे झारखंड में शोक की लहर है। राज्य सरकार ने दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम जनता ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। दिशोम गुरु ने जो आंदोलन शुरू किया था, आज उसकी विरासत उनके बेटे हेमंत सोरेन और झामुमो पार्टी के कंधों पर है। झारखंड की राजनीति में उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी, लेकिन उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते रहेंगे।
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